निर्यातों के लिए खुला खजाना
निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर सामने है। केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि भारत के पास 38 विकसित देशों के साथ ऐसे समझौते (FTAs) हैं, जिनसे करीब दो-तिहाई वैश्विक व्यापार में पहुंच का रास्ता खुलता है। लेकिन इस मौके का पूरा फायदा उठाने के लिए, भारतीय कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज़ की क्वालिटी पर खास ध्यान देना होगा। इससे खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs), किसानों और कारीगरों को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में कॉम्पिटिशन में बने रहने में मदद मिलेगी।
क्वालिटी ही ग्लोबल मार्केट की चाबी
Goyal के मुताबिक, क्वालिटी ही ग्लोबल बाज़ारों में कामयाबी की चाबी है। भारत ने अब तक 37 देशों के साथ आठ FTAs पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, UAE और EFTA जैसे देश शामिल हैं। इन समझौतों से भारतीय एक्सपोर्टर्स को कम या जीरो-ड्यूटी पर सामान भेजने का फायदा मिलता है। मगर, असल में निर्यात बढ़ाने के लिए भारतीय कंपनियों को कड़े अंतर्राष्ट्रीय क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होगा। चिंता की बात यह है कि करीब 63% MSMEs के पास ग्लोबल रेगुलेशन के लिए ज़रूरी ISO जैसी सर्टिफिकेशन नहीं हैं। विकसित बाज़ारों में नियम बहुत सख्त होते हैं, जहां ज़रा सी चूक से प्रोडक्ट रिजेक्ट हो सकता है। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के मुकाबले भारतीय एक्सपोर्टर्स को अक्सर 15-20% का कॉस्ट डिसएडवांटेज झेलना पड़ता है। इसकी वजह कच्चे माल पर ऊंचे ड्यूटी, लॉजिस्टिक्स में अक्षमता और पुरानी मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी है।
चुनौतियां और विकास के आंकड़े
आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल-जनवरी फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान भारत का मर्चेंडाइज और सर्विसेज़ एक्सपोर्ट $714.73 बिलियन तक पहुंचा, जो 5.26% की बढ़ोतरी है। WTO का अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल मर्चेंडाइज ट्रेड ग्रोथ 1.9% ही रहेगी, ऐसे में भारत के लिए निर्यात बढ़ाना एक चुनौती है। इस स्थिति को बदलने और FY28 तक $1 ट्रिलियन एक्सपोर्ट का लक्ष्य हासिल करने के लिए, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को टेक्नोलॉजी-बेस्ड कॉम्पिटिशन और वैल्यू एडिशन पर ज़ोर देना होगा। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसे प्रोग्राम्स इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा जैसे सेक्टर को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पूरे करना आज भी सबसे अहम है। ये सभी प्रयास 'विक्सित भारत 2047' के विज़न को पूरा करने में मदद करेंगे, जिसका मकसद स्किल डेवलपमेंट और महिला-नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देकर आर्थिक समृद्धि लाना है।
CSR और समग्र विकास
मंत्री Goyal ने उन कंपनियों की भी तारीफ की जिन्होंने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) खर्च की सीमा को पार किया। उन्होंने इसे सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य के बाज़ारों और टैलेंट में एक निवेश बताया। उन्होंने कहा कि एक कंपनी ने अपने मुनाफे का 5% CSR पर खर्च किया, जो कि एक बड़ा कदम है। यह आर्थिक विकास को निर्यात और सामाजिक प्रगति के साथ जोड़ने की एक समग्र रणनीति को दर्शाता है।