भारत का बड़ा दांव! UK, EU, ओमान, कनाडा से FTA डील पक्की, ग्लोबल मंदी में 'आर्थिक ढाल' तैयार

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत का बड़ा दांव! UK, EU, ओमान, कनाडा से FTA डील पक्की, ग्लोबल मंदी में 'आर्थिक ढाल' तैयार
Overview

भारत एक के बाद एक कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर तेजी से मुहर लगा रहा है। इनमें यूके (UK), ओमान, न्यूजीलैंड, यूरोपीय यूनियन (EU) और कनाडा जैसे प्रमुख पार्टनर शामिल हैं। इन समझौतों का मकसद भारतीय एक्सपोर्ट्स (Exports) को बढ़ावा देना, टैरिफ (Tariff) कम करना और आर्थिक संबंधों को गहरा करना है।

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वैश्विक स्तर पर व्यापार में सुस्ती के बीच भारत अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठा रहा है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने 2025 में वैश्विक व्यापार में 0.2% की गिरावट का अनुमान लगाया है, ऐसे में भारत ने यूके (UK), ओमान, न्यूजीलैंड, यूरोपीय यूनियन (EU) और कनाडा जैसे देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की रफ्तार तेज कर दी है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य भारतीय एक्सपोर्ट्स के लिए सुरक्षित बाजार तैयार करना, टैरिफ को कम करना और ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी स्थिति को और मजबूत करना है।

38 देशों से FTA का नेटवर्क

भारत के ये नए समझौते देश के FTA नेटवर्क को नौ समझौतों के तहत 38 देशों तक पहुंचा देंगे। यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ डीलें अंतिम चरण में हैं, वहीं EU और कनाडा के साथ बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। इन समझौतों को सिर्फ व्यापार बढ़ाने के अवसर के तौर पर नहीं, बल्कि एक अनिश्चित दुनिया में आर्थिक स्थिरता हासिल करने के रणनीतिक औजार के रूप में देखा जा रहा है।

निर्यात को मिलेगी बड़ी संजीवनी

ये FTAs भारत के प्रमुख उद्योगों के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, भारत-यूके समझौते के तहत लगभग सभी भारतीय एक्सपोर्ट्स को यूके में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जिससे भारतीय कंपनियां बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले बराबरी पर आ जाएंगी। टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स, फार्मा और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सेक्टरों को कम टैरिफ और आसान कस्टम प्रक्रियाओं का फायदा मिलने की उम्मीद है। ओमान के साथ शून्य-ड्यूटी एक्सेस से 2030 तक इंजीनियरिंग सामानों की शिपमेंट में काफी बढ़ोतरी का अनुमान है।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि, इन समझौतों में कुछ चुनौतियां भी हैं। यूके डील में भारत आने वाले सामानों के लिए टैरिफ में चरणबद्ध कमी शामिल है, जो यूके में भारतीय निर्यात को मिलने वाली तत्काल एक्सेस के विपरीत है। EU के साथ होने वाले बड़े समझौते के लिए भारत को सस्टेनेबिलिटी, लेबर और पर्यावरण मानकों जैसे कड़े नियमों का पालन करना होगा। इन जटिल रेगुलेशंस को पूरा करने में भारतीय उद्योगों को काफी लागत आ सकती है, जिससे टैरिफ से होने वाले फायदे कम हो सकते हैं। पिछले FTAs के अनुभव भी मिले-जुले रहे हैं, जहां भारत को ASEAN, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों के साथ व्यापार घाटा हुआ है।

आगे की राह

ओमान और EU के साथ व्यापक साझेदारी समझौतों में माल व्यापार के साथ-साथ सेवाएं, निवेश और नियामक सहयोग भी शामिल हैं। कनाडा के साथ 2026 के अंत तक डील पूरी करने की तेज वार्ता भारत की इसी रणनीति का हिस्सा है। ये समझौते भारत की वैश्विक व्यापार में स्थिति को और मजबूत करेंगे और देश को बदलते वैश्विक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाने में मदद करेंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.