इटली के मिलान में अमेरिकी कॉन्सुलेट के निर्माण कार्य में लगे **480** से ज्यादा विदेशी कामगारों (ज्यादातर भारतीय) को आखिरकार मुआवजा मिलना शुरू हो गया है। यह समझौता **31 मिलियन यूरो** के सेटलमेंट का हिस्सा है, जिसे वेतन चोरी और शोषण के दावों को सुलझाने के लिए किया गया है।
भारी मुआवजे का ऐलान
इस मामले में एक ऐतिहासिक सेटलमेंट हुआ है, जिसके तहत भारतीय कामगारों को बड़ी राहत मिली है। औसत व्यक्तिगत पेआउट 45,000 यूरो के आसपास है, जबकि कुछ मामलों में यह राशि 90,000 यूरो तक पहुंच रही है। यह फंड बकाया ओवरटाइम, अवैध हाउसिंग कटौती और काम के दौरान हुए अन्य नुकसानों की भरपाई के लिए दिया जा रहा है। कुल 480 कामगार इस प्रक्रिया के तहत लाभान्वित हो रहे हैं।
कंपनी का रुख और विवाद
इस प्रोजेक्ट को लीड करने वाली अलाबामा स्थित कंपनी, Caddell Construction ने इस सेटलमेंट पर सहमति तो जताई है, लेकिन कंपनी ने किसी भी तरह की कानूनी जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार किया है। यह समझौता सिर्फ सिविल दावों को सुलझाता है।
गंभीर आरोप और कानूनी शिकंजा
जांच में सामने आया था कि कामगारों से हफ्ते में 60 घंटे से ज्यादा काम कराया जाता था और ओवरटाइम भी नहीं दिया जाता था। इसके अलावा, इटली आने के लिए हर वर्कर से 5,000 यूरो तक की अवैध रिक्रूटमेंट फीस ली गई थी, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस गए थे।
हालांकि कामगारों को इटली में रहने के लिए वर्क परमिट मिल गया है, लेकिन Caddell Construction की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। इटली के अधिकारी अब भी क्रिमिनल जांच कर रहे हैं। कंपनी के दो मैनेजर्स इस वक्त हाउस अरेस्ट में हैं, जिन पर जबरन वसूली और अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने के आरोप हैं। साथ ही, कंपनी को इटली की सोशल सिक्योरिटी में 11.2 मिलियन यूरो का भुगतान करने का आदेश भी दिया गया है।
