Schengen Visa: भारतीयों को लगा ₹155 करोड़ का झटका, 1.8 लाख से ज्यादा हुए रिजेक्ट!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Schengen Visa: भारतीयों को लगा ₹155 करोड़ का झटका, 1.8 लाख से ज्यादा हुए रिजेक्ट!

साल 2025 में भारतीय यात्रियों को शेंगेन वीज़ा (Schengen Visa) रिजेक्शन के कारण लगभग ₹154.9 करोड़ का नुकसान हुआ है। वीज़ा रिजेक्शन की दर **15.8%** रही, जिससे **1.81 लाख** से ज्यादा आवेदन खारिज हो गए।

वीज़ा रिजेक्शन से हुआ बड़ा नुकसान

साल 2025 भारतीय यात्रियों के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका लेकर आया है। शेंगेन वीज़ा (Schengen Visa) के लिए 11.5 लाख से ज्यादा आवेदन भरे गए, जिनमें से 15.8% आवेदन रिजेक्ट हो गए। इसके चलते, 1.81 लाख से ज्यादा भारतीयों को वीज़ा नहीं मिला और उनकी नॉन-रिफंडेबल फीस के तौर पर लगभग ₹154.9 करोड़ डूब गए। यह डेटा भारत जैसे तेजी से बढ़ते आउटबाउंड ट्रैवल मार्केट के लिए एक बड़ा बैरियर दिखाता है, जो टूरिज्म इंडस्ट्री और ट्रैवल कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है।

आउटबाउंड ट्रैवल ट्रेंड्स पर असर

हालांकि यूरोप भारतीय यात्रियों का पसंदीदा डेस्टिनेशन बना हुआ है, लेकिन वीज़ा प्रक्रिया में लगातार आ रही मुश्किलें यात्रा को धीमा कर सकती हैं। ट्रैवल कंपनियों के लिए, यह सीधे तौर पर बड़ा फाइनेंशियल लॉस नहीं है क्योंकि उनकी कमाई अक्सर फ्लाइट और होटल बुकिंग से होती है, जो वीज़ा अप्रूवल से स्वतंत्र हो सकती है। लेकिन, लगातार रिजेक्शन की वजह से लोगों के ट्रैवल करने का तरीका बदल सकता है।

यात्री अब उन डेस्टिनेशन्स की ओर रुख कर सकते हैं जहाँ ई-वीज़ा (e-visa) या वीज़ा-ऑन-अराइवल (visa-on-arrival) जैसी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं, जैसे दक्षिण-पूर्व एशिया या मध्य-पूर्व के देश। अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो ट्रैवल सर्विस प्रोवाइडर्स को अपने मार्केटिंग और प्रोडक्ट ऑफरिंग में बदलाव करना पड़ सकता है, जिससे उनके इंटरनेशनल पैकेजों के एवरेज टिकट प्राइस और प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

रिजेक्शन के मुख्य कारण

वीज़ा रिजेक्शन की हाई रेट का कोई एक कारण नहीं है, बल्कि यह कई वजहों का मिला-जुला असर है। यूरोपियन कमीशन (European Commission) के डेटा के अनुसार, रिजेक्शन के आम कारणों में पर्याप्त फाइनेंशियल प्रूफ न होना, यात्रा के उद्देश्य को लेकर कमजोर डॉक्यूमेंटेशन, और भारत वापस लौटने के इरादे का विश्वसनीय प्रमाण न दे पाना शामिल है। यूरोपियन काउंसलेट्स ने आवेदकों की प्रोफाइल की जांच-पड़ताल तेज कर दी है, जिसमें फाइनेंशियल रिकॉर्ड और टैक्स फाइलिंग्स का बारीकी से क्रॉस-रेफरेंसिंग शामिल है। ऐसे में, जिन आवेदकों के पास परफेक्ट डॉक्यूमेंटेशन नहीं होता, उनके लिए यह एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क बन जाता है, जिससे नॉन-रिफंडेबल वीज़ा फीस का नुकसान होता है।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

ट्रैवल सेक्टर में निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे डेस्टिनेशन की डिमांड में हो रहे बदलाव पर नजर रखें। अगर यूरोप के पॉपुलर डेस्टिनेशन्स के लिए वीज़ा रिजेक्शन में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो यह आउटबाउंड टूरिज्म के प्रीमियम सेगमेंट के रेवेन्यू को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, जो ट्रैवल कंपनियां अपने ऑफरिंग्स को तेजी से बढ़ते और वीज़ा-फ्रेंडली रीजन्स की ओर सफलतापूर्वक मोड़ सकती हैं, वे अपनी बुकिंग वॉल्यूम में बेहतर स्थिरता देख सकती हैं। निवेशकों को बड़े ट्रैवल प्लेयर्स से आने वाले तिमाही अपडेट्स पर गौर करना चाहिए, ताकि डेस्टिनेशन ट्रेंड्स में बदलाव और वीज़ा से जुड़ी मुश्किलों का उनकी कुल बुकिंग पर पड़ने वाले असर पर नजर रखी जा सके। फिलहाल, व्यापक ट्रैवल मार्केट में ग्रोथ जारी है, लेकिन यूरोपियन ट्रैवल के खास सेगमेंट को एक्सेसिबिलिटी और कॉस्ट एफिशिएंसी के मामले में स्पष्ट चुनौतियां झेलनी पड़ रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.