Nepal Flood Crisis: फंसे हुए मजदूरों तक पहुंची भारतीय रेस्क्यू टीम, **27** पावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान

INTERNATIONAL-NEWS
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nepal Flood Crisis: फंसे हुए मजदूरों तक पहुंची भारतीय रेस्क्यू टीम, **27** पावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारतीय रेस्क्यू टीमों ने वहां के हाइड्रोपावर टनल में पहुंच बनाई है। **26** अगस्त को आई इस आपदा में कम से कम **27** हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।

स्पेशलाइज्ड भारतीय रेस्क्यू टीमों ने नेपाल के उन हाइड्रोपावर टनल के अंदर तक पहुंच बना ली है, जो 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (Flash Flood) के बाद से बंद थे। रेस्क्यू टीमें 'चिलिमे' और 'लंगटांग' साइट्स पर 185 मीटर की गहराई तक पहुंच चुकी हैं और नेपाली सेना के साथ मिलकर मलबे से भरे टनल में बचाव कार्य चला रही हैं।

मानवीय संकट और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान

इस आपदा में मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और 900 से ज्यादा मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं। त्रिशूली और भोटे कोशी नदी के किनारे बने कुल 27 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स (जिनमें 12 चालू थे और 15 निर्माणधीन थे) मलबे में दब गए हैं।

आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रभाव

नेपाल का हाइड्रोपावर सेक्टर न केवल घरेलू बिजली बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा व्यापार (Energy Trade) के लिए भी बेहद अहम है। टनल और पावर जेनरेशन इक्विपमेंट के तबाह होने से इनकी बहाली एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी। मरम्मत के लिए भारी मशीनरी की जरूरत है, लेकिन सड़कों और पुलों के बह जाने के कारण राहत और बचाव कार्यों में काफी दिक्कतें आ रही हैं।

आगे की राह

निवेशकों और एनर्जी प्लानर्स की नजरें अब नुकसान की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। फिलहाल मलबे को साफ करना और स्ट्रक्चरल रिपेयर शुरू करना बड़ी चुनौती है। जब तक पहुंच पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती, तब तक आर्थिक नुकसान का सही अंदाजा लगा पाना मुश्किल है, जिससे क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान बना रह सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.