नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारतीय टेक्निकल टीमें Chilime हाइड्रो पावर टनल से मलबा हटाने में जुटी हैं। इस आपदा ने नेपाल के शेयर बाजार (NEPSE) में भारी उठापटक पैदा कर दी है, जिससे पावर और इंश्योरेंस सेक्टर के शेयरों पर दबाव बढ़ गया है।
राहत और बचाव की स्थिति
भारतीय टेक्निकल एक्सपर्ट्स और नेपाली सेना ने Rasuwa जिले में स्थित Chilime हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। मलबे के बीच रास्ता बनाते हुए टीमें अब भारी उपकरणों के साथ टनल के ब्लॉक हो चुके हिस्सों तक पहुंचने में सफल हो रही हैं। यह प्रगति 26 अगस्त, 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर फटने से आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद देखने को मिली है।
इस आपदा में अब तक 1,344 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 4,900 लोग अभी भी लापता हैं। हालांकि 4 सितंबर को Trishuli 3A टनल से दो लोगों को सुरक्षित निकालने से थोड़ी उम्मीद जगी है, लेकिन बुनियादी ढांचे (डैम, पावर प्लांट और सड़कें) को हुआ नुकसान बहुत बड़ा है।
बाजार पर असर (Market Impact)
इस तबाही का सीधा असर नेपाल स्टॉक एक्सचेंज (NEPSE) पर दिख रहा है। पावर और नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का दौर जारी है। Rasuwa और Nuwakot जिलों में काम करने वाली कंपनियां अब ऑपरेशनल संकट से जूझ रही हैं। पावर जनरेशन ठप होने से इन कंपनियों के रेवेन्यू पर चोट पहुंची है, जिससे उनके कर्ज चुकाने की क्षमता (Debt servicing) पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
इंश्योरेंस सेक्टर की बात करें तो बीमा कंपनियां अब बड़े पैमाने पर आने वाले क्लेम्स (Damage claims) की तैयारी कर रही हैं। Bhotekoshi नदी के इलाके में हुई भारी तबाही के कारण इंश्योरेंस कंपनियों के प्रॉफिट और कैपिटल बफर पर短期 (short-term) असर पड़ना तय माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए स्थिति अभी चुनौतीपूर्ण है। नेपाल में बिजनेस कर रही भारतीय कंपनियों की सप्लाई चेन और कॉन्ट्रैक्ट्स पर कितना असर पड़ेगा, यह साइट के असेसमेंट के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल, मार्केट की नजरें अब सरकारी राहत पैकेजों और पावर प्रोजेक्ट्स के लिए डेट रिस्ट्रक्चरिंग (Debt restructuring) पर टिकी हैं।
