होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे MT On Peace टैंकर पर हुए हमले में 11 भारतीय नाविक घायल हो गए हैं। इस घटना ने ग्लोबल मैरीटाइम सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जिससे शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम और फ्रेट लॉजिस्टिक्स पर दबाव बढ़ सकता है।
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को पनामा-फ्लैग वाले टैंकर MT On Peace पर होरमुज जलडमरूमध्य में एक प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। इस घटना में कुल 12 क्रू मेंबर्स घायल हुए, जिनमें 11 भारतीय नागरिक शामिल हैं। घायलों को तुरंत ओमान के खसाब (Khasab) ले जाया गया, जहाँ उनका मेडिकल इलाज चल रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा नाविकों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया है।
मैरीटाइम सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स पर असर
होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट है, जहाँ से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस गुजरता है। इस इलाके में सुरक्षा बिगड़ने का सीधा असर शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ता है। ऐसे हालातों में इंश्योरेंस कंपनियां 'वॉर रिस्क' प्रीमियम बढ़ा देती हैं, जिसका सीधा बोझ शिपिंग कंपनियों और कार्गो मालिकों पर पड़ता है।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है जरूरी?
शिपिंग और एनर्जी लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को अब फ्यूल, क्रू इंश्योरेंस और रिरूटिंग के बढ़ते खर्चों पर ध्यान देना होगा। अगर ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो शिपिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है और फ्रेट रेट्स में बढ़ोतरी से कमोडिटी कीमतों, खासकर तेल और गैस की इंपोर्ट लागत पर असर पड़ सकता है। बाजार अब इस पर नजर बनाए हुए है कि क्या ये सुरक्षा जोखिम सप्लाई चेन में बड़ी रुकावटें पैदा करेंगे या नहीं।
