US Green Card: भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बुरी खबर, ग्रीन कार्ड मिलने में लग सकते हैं **179** साल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
US Green Card: भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बुरी खबर, ग्रीन कार्ड मिलने में लग सकते हैं **179** साल

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। EB-2 वीजा कैटेगरी में ग्रीन कार्ड का वेटिंग पीरियड अब **179** साल तक पहुंच सकता है। इस संकट का सीधा असर भारतीय IT सेक्टर के वर्कफोर्स और कॉस्ट स्ट्रक्चर पर पड़ सकता है।

अमेरिका में परमानेंट रेजिडेंसी (Green Card) पाने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए स्थिति विकट होती जा रही है। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, EB-2 वीजा कैटेगरी में वेटिंग टाइम अब 179 साल के स्तर तक पहुंच गया है। यह समस्या केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टम फेलियर का संकेत है, जिससे लगभग 10 लाख भारतीय प्रभावित हैं। ये लोग कुल एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड इमीग्रेशन बैकलॉग का 79% हिस्सा हैं।

क्यों गहरा रहा है यह संकट?

अमेरिका की वीजा प्रणाली में हर साल 1,40,000 एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं, जिसमें प्रति देश 7% की सीमा निर्धारित है। भारत जैसे देशों से हाई-स्किल्ड आवेदकों की भारी संख्या होने के बावजूद, ये कोटा काफी सीमित हैं। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, EB-3 कैटेगरी में 38 साल और EB-1 कैटेगरी में 4 से 5 साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

IT सेक्टर पर पड़ेगा क्या असर?

भारतीय IT कंपनियां लंबे समय से H-1B वीजा मॉडल पर निर्भर रही हैं, ताकि वे क्लाइंट्स के करीब रहकर सर्विस दे सकें। हालांकि, ग्रीन कार्ड में देरी के कारण टैलेंट रिटेंशन की चुनौती बढ़ गई है। कई प्रोफेशनल्स अब कनाडा या यूरोप का रुख कर रहे हैं, जिससे कंपनियों को अपने अनुभवी प्रोजेक्ट लीडर्स को खोने का डर है।

कर्मचारियों की बार-बार रोटेशन से कंपनियों के ऑपरेशनल खर्च में भी उछाल आता है। इन जोखिमों को कम करने के लिए अब IT फर्में 'ऑफशोर-फर्स्ट' स्ट्रेटजी पर तेजी से काम कर रही हैं। इसके तहत हाई-एंड डेवलपमेंट का काम अमेरिका के बजाय भारत से किया जा रहा है।

निवेशकों के लिए जरूरी संकेत

आने वाले क्वार्टरली अर्निंग कॉल्स में निवेशकों को कंपनियों की 'ऑनसाइट बनाम ऑफशोर' डिलीवरी रेशियो पर नजर रखनी चाहिए। वीजा कॉस्ट और यूएस में एट्रिशन रेट (कर्मचारियों के छोड़ने की दर) पर मैनेजमेंट की कमेंट्री यह बताएगी कि कंपनियां इस लंबे टैलेंट संकट को कितनी कुशलता से संभाल रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.