अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला और रिफंड का रास्ता
हाल ही में 20 फरवरी, 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन (Trump administration) द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (International Emergency Economic Powers Act) के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ (Tariffs) गैर-कानूनी थे।
इस फैसले के बाद, U.S. Customs and Border Protection ने 20 अप्रैल, 2026 से इस रिफंड (Refund) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खास बात यह है कि सरकार से यह पैसा सीधे तौर पर केवल उन्हीं U.S. Importers को मिलेगा जिन्होंने मूल रूप से टैरिफ का भुगतान किया था। भारतीय एक्सपोर्टर्स (Exporters) के पास इस रिफंड का कोई सीधा क्लेम (Claim) नहीं है। उन्हें यह पैसा वापस पाने के लिए अपने अमेरिकी खरीदारों (Buyers) के साथ बातचीत करनी होगी।
कौन से सेक्टर्स पर असर?
यह मामला भारत के प्रमुख एक्सपोर्ट सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल (Textiles), अपैरल (Apparel), इंजीनियरिंग गुड्स (Engineering Goods) और केमिकल्स (Chemicals) के लिए खास अहमियत रखता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट (Global Trade Research Institute) का अनुमान है कि दुनिया भर में कुल रिफंड $166 अरब तक पहुंच सकता है, जिसमें भारत से जुड़े सामानों का हिस्सा करीब $12 अरब है।
आगे की राह और ट्रेड टेंशन
इस बीच, भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत (Trade Talks) जारी है। भविष्य में Section 301 of the Trade Act of 1974 के तहत नए टैरिफ लगने की भी संभावना है, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक अनिश्चितता (Trade Uncertainty) को बढ़ा सकती है। इसलिए, मौजूदा मुद्दों को सुलझाना दोनों देशों के लिए ज़रूरी है।
