भारत और आइसलैंड का साथ: क्लीन एनर्जी और व्यापार में बढ़ेगा सहयोग

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारत और आइसलैंड का साथ: क्लीन एनर्जी और व्यापार में बढ़ेगा सहयोग
Overview

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्टीन फ्रॉस्टाडोतिर के साथ भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में मुलाकात की। दोनों देशों ने क्लीन एनर्जी, जियोथर्मल एनर्जी, फिशरीज और ब्लू इकोनॉमी में सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया। भारत-ईएफटीए (EFTA) ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) को द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ाने में अहम बताया गया, जिसका लक्ष्य सस्टेनेबल डेवलपमेंट और उभरती टेक्नोलॉजी में एक-दूसरे की ताकत का फायदा उठाना है।

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नॉर्डिक देशों से रिश्ते होंगे और मजबूत

भारत नॉर्डिक देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। इस नए फोकस के जरिए भारत, रिन्यूएबल एनर्जी और ब्लू इकोनॉमी में आइसलैंड की विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा। भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हुई चर्चाओं से जलवायु कार्रवाई (Climate Action) और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता जाहिर होती है।

जियोथर्मल और ब्लू इकोनॉमी में तालमेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्टीन फ्रॉस्टाडोतिर के बीच भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन (India-Nordic Summit) में हुई मुलाकात का मुख्य एजेंडा क्लीन एनर्जी और ब्लू इकोनॉमी में सहयोग बढ़ाना रहा। बातचीत में जियोथर्मल एनर्जी के इस्तेमाल, कार्बन कैप्चर और स्टोरेज जैसी टेक्नोलॉजी पर खास ध्यान दिया गया। ब्लू इकोनॉमी में आइसलैंड की मजबूत पकड़ को एक बड़ा फायदा माना जा रहा है, और भारत-ईएफटीए (EFTA) ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में बड़ी वृद्धि की उम्मीद है। भारत हिमाचल प्रदेश में अपने जियोथर्मल एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट्स को भी आगे बढ़ा रहा है और कूलिंग के लिए जियोथर्मल हीट का उपयोग करने की संभावनाएं तलाश रहा है। अक्टूबर 2025 में स्थापित भारत-आइसलैंड SITE नेटवर्क, आइसलैंड की रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम को भारत की इम्प्लीमेंटेशन कैपेबिलिटीज के साथ जोड़कर इस दिशा में और मदद करेगा।

भारत-ईएफटीए (EFTA) ट्रेड का फायदा

भारत-ईएफटीए (EFTA) ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA), जो 1 अक्टूबर, 2025 से लागू है, भारत और आइसलैंड सहित EFTA सदस्य देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों का केंद्र है। 16 साल की लंबी बातचीत के बाद अंतिम रूप दिए गए इस समझौते का लक्ष्य ज्यादातर सामानों पर टैरिफ खत्म करना और सेवाओं व निवेश में व्यापार खोलना है। EFTA देशों ने अगले 15 सालों में भारत में US$100 बिलियन का निवेश करने का वादा किया है, जिससे 10 लाख नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। इस डील से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स और मशीनरी जैसे सेक्टरों में भारत के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, वहीं EFTA देशों को स्विस चीज़ और चॉकलेट जैसे अपने प्रोडक्ट्स के लिए बेहतर बाजार मिलेगा। यह समझौता 14 चैप्टर में फैला हुआ है, जिसमें इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और विवाद समाधान जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसका कार्यान्वयन तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में एक अहम मुद्दा रहा, जो भविष्य के आर्थिक सहयोग के लिए इसके महत्व को दर्शाता है।

आगे की संभावित चुनौतियाँ

भारत-EFTA TEPA द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण अवसरों के बावजूद, कुछ संभावित चुनौतियाँ बनी हुई हैं। EFTA देशों के साथ भारत का मौजूदा व्यापार घाटा, जो काफी हद तक स्विट्जरलैंड से सोने के आयात के कारण है, एक कारक बना हुआ है। हालांकि समझौता भारत के एक्सपोर्ट को बढ़ाने का प्रयास करता है, सोने के आयात पर देश की निर्भरता बनी हुई है, जिसके संबंधित ड्यूटी पर समझौते का ज़्यादा असर नहीं हुआ है। इसके अलावा, EFTA देशों से US$100 बिलियन के अनुमानित FDI को प्राप्त करना भारत में निरंतर आर्थिक सुधारों और एक स्थिर वैश्विक आर्थिक माहौल पर निर्भर करेगा, जो बाहरी झटकों से प्रभावित हो सकता है। चारों EFTA देशों के विविध रेगुलेटरी परिदृश्यों को नेविगेट करने के लिए भारतीय व्यवसायों से पूरी जांच-पड़ताल की भी आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त, फार्मास्यूटिकल्स और मशीनरी जैसे विशिष्ट व्यापार क्षेत्रों पर एक मजबूत फोकस दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मांग में उतार-चढ़ाव के प्रति उजागर कर सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.