NSA अजीत डोभाल की हनोई यात्रा ने भारत और वियतनाम के बीच डिफेंस और इंटेलिजेंस सहयोग को नई मजबूती दी है। वियतनाम द्वारा अपने मिलिट्री हार्डवेयर सप्लाई को डायवर्सिफाई करने के फैसले से भारतीय कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट के बड़े अवसर बन रहे हैं।
डिफेंस सेक्टर के लिए नए अवसर
NSA अजीत डोभाल की 2 नवंबर, 2026 को हुई हनोई यात्रा भारत और वियतनाम के बीच 'एनहैंस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' को अगले स्तर पर ले जाने वाला कदम है। इस दौरे में रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग और साइबर सिक्योरिटी के साथ-साथ डिफेंस को-ऑपरेशन पर विशेष जोर दिया गया है।
डिफेंस एक्सपो में बढ़ेगी हिस्सेदारी
पब्लिक सिक्योरिटी मिनिस्टर जनरल लुओंग टैम क्वांग के साथ हुई बातचीत से साफ है कि वियतनाम अब भारत की आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की तकनीक में खासी रुचि ले रहा है। खास बात यह है कि वियतनाम ने भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को दिसंबर में होने वाले 'वियतनाम इंटरनेशनल डिफेंस एक्सपो' के लिए आमंत्रित किया है। यह कदम 'ब्रह्मोस' (BrahMos) जैसी मिसाइल प्रणालियों की सफलता से आगे बढ़कर, अन्य डिफेंस प्लेटफॉर्म्स के लिए भी वियतनाम के दरवाजे खोलने का काम कर सकता है।
निवेश का नजरिया और जोखिम
निवेशकों को इसे एक लंबी अवधि के 'स्ट्रैटेजिक ट्रेंड' के रूप में देखना चाहिए। हालांकि यह खबर डिफेंस एक्सपोर्ट के लिहाज से पॉजिटिव है, लेकिन इस सेक्टर में एक्जीक्यूशन रिस्क बने रहते हैं। ग्लोबल मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा और लंबी अवधि के प्रोजेक्ट्स के चलते रेवेन्यू के आंकड़े सरकारी ऑर्डर्स मिलने के बाद ही साफ होंगे। दिसंबर का डिफेंस एक्सपो और उसके बाद की घोषणाएं भारतीय डिफेंस कंपनियों के ऑर्डर-बुक के लिए अहम 'मॉनिटरेबल' फैक्टर साबित होंगी।
