भारत ने श्रीलंका के साथ अपनी टैक्स संधि में अहम बदलाव करते हुए 'प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट' (PPT) को शामिल किया है। इसका मकसद टैक्स चोरी को रोकना है। 1 अप्रैल, 2027 से कंपनियों को संधि का लाभ उठाने के लिए यह साबित करना होगा कि उनके निवेश ढांचे का कोई वास्तविक व्यावसायिक औचित्य है।
भारत-श्रीलंका टैक्स संधि में बड़ा फेरबदल
भारत सरकार ने श्रीलंका के साथ दोहरे कराधान से बचाव (DTAA) समझौते में एक कड़े 'प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट' (PPT) को शामिल कर लिया है। यह नया नियम 19 जून, 2026 से लागू हो गया है और दोनों देशों के बीच सीमा पार निवेश (Cross-border investment) के मूल्यांकन के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य संधि के दुरुपयोग को रोकना है, ताकि कंपनियां सिर्फ टैक्स बचाने के लिए अपने ढांचे का इस्तेमाल न कर सकें, बल्कि वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करें।
निवेश ढांचे पर असर
'प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट' के आने से टैक्स जांच अब केवल कानूनी नियमों के पालन से हटकर व्यावसायिक इरादे के मूल्यांकन पर केंद्रित होगी। नए नियमों के तहत, अगर टैक्स अधिकारी यह पाते हैं कि किसी सौदे या व्यवस्था का एक मुख्य उद्देश्य टैक्स का लाभ उठाना था, तो वे संधि के तहत मिलने वाले लाभों से इनकार कर सकते हैं। इसका मतलब है कि दोनों देशों में स्थापित होल्डिंग कंपनियों (Holding Companies) या स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPVs) को अब वास्तविक आर्थिक गतिविधि (Economic Activity) का प्रमाण देना होगा। सिर्फ कानूनी शर्तें पूरी करना काफी नहीं होगा, अगर ढांचे का कोई स्पष्ट व्यावसायिक कारण (Commercial Rationale) नहीं है।
वैश्विक मानकों के अनुरूप
यह संशोधन भारत-श्रीलंका टैक्स संधि को OECD के मानकों के अनुरूप लाता है, खासकर बेस इरोजन एंड प्रॉफिट शिफ्टिंग (BEPS) फ्रेमवर्क के तहत। PPT को शामिल करके, भारत अपनी टैक्स संधि नेटवर्क को वैश्विक स्तर पर टैक्स चोरी रोकने की प्रथाओं के समान बना रहा है। इसी तरह के प्रावधान भारत की कई अन्य टैक्स संधियों में मल्टीलेटरल इंस्ट्रूमेंट (MLI) के माध्यम से पहले ही शामिल किए जा चुके हैं। श्रीलंका के साथ एक विशेष द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के माध्यम से इसे लागू करने का निर्णय, एक ऐसे गलियारे पर प्रवर्तन को मजबूत करने के केंद्रित प्रयास को दर्शाता है जहां महत्वपूर्ण निवेश होता है। हालांकि प्रोटोकॉल अब सक्रिय है, लेकिन यह प्रावधान भारत में 1 अप्रैल, 2027 से शुरू होने वाली आय पर लागू होंगे। इससे कंपनियों को अपनी टैक्स और निवेश रणनीतियों की समीक्षा करने और उन्हें समायोजित करने के लिए एक संक्रमणकालीन अवधि (Transition Window) मिलेगी।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
भारत और श्रीलंका के बीच व्यापार करने वाली कंपनियों और निवेशकों के लिए, व्यावसायिक उपस्थिति (Business Substance) के दस्तावेजीकरण पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। भविष्य में, करदाताओं पर यह साबित करने का दबाव बढ़ सकता है कि उनके निवेश टैक्स की बचत के बजाय वैध आर्थिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं। निवेशकों को अप्रैल 2027 की प्रवर्तन तिथि से पहले इन बढ़ी हुई आवश्यकताओं के साथ अपने मौजूदा होल्डिंग ढांचे का मूल्यांकन करना चाहिए। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) से 'प्रिंसिपल पर्पस' को साबित करने के लिए विशिष्ट मानदंडों पर आने वाले मार्गदर्शन पर भी नजर रखनी चाहिए, जो कॉर्पोरेट टैक्स प्लानिंग के लिए और स्पष्टता प्रदान करेगा।
