भारत का बड़ा सहारा पैकेज! गल्फ संकट के बीच एक्सपोर्टर्स को ₹497 Cr की मदद, व्यापार को मिलेगी नई जान

INTERNATIONAL-NEWS
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
भारत का बड़ा सहारा पैकेज! गल्फ संकट के बीच एक्सपोर्टर्स को ₹497 Cr की मदद, व्यापार को मिलेगी नई जान
Overview

भारत सरकार ने आज बड़ा कदम उठाते हुए **₹497 करोड़** का एक खास 'RELIEF' पैकेज लॉन्च किया है। इस स्कीम का मकसद गल्फ संकट के चलते भारतीय एक्सपोर्टर्स को हो रही परेशानियों, जैसे बढ़ी हुई शिपिंग कॉस्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम, से राहत देना है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

RELIEF स्कीम: यह है सरकारी मदद का पूरा प्लान

इस स्कीम का पूरा नाम Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation (RELIEF) है, जिसे भारतीय एक्सपोर्टर्स पर पड़ रहे वित्तीय दबाव को कम करने के लिए लाया गया है। पर्शियन गल्फ में बढ़ते तनाव ने समुद्री व्यापार मार्गों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे शिपिंग और वॉर रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी उछाल आया है। कई भारतीय कंपनियों, खासकर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए, ये बढ़ी हुई लागतें व्यापार को रोकने वाली थीं।

क्या-क्या मिलेगा एक्सपोर्टर्स को?

सरकार इस पैकेज के तहत बीते और आने वाले शिपमेंट्स को कवर करेगी। 14 फरवरी से 15 मार्च 2026 तक भेजे गए सामानों के लिए, सरकार UAE, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, इजरायल और यमन जैसे देशों के लिए 100% इंश्योरेंस कवरेज देगी। यह मुख्य शिपिंग रूट्स के बंद होने से होने वाले तात्कालिक नुकसान की भरपाई के लिए है। वहीं, 16 मार्च से 15 जून 2026 तक जारी होने वाले बिल ऑफ लैडिंग वाले कंसाइनमेंट्स के लिए, वॉर रिस्क और पॉलिटिकल रिस्क को पुराने प्रीमियम स्तर पर कवर किया जाएगा। एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ECGC) अपनी कवरेज को 75-80% से बढ़ाकर 95% तक कर सकता है, और सरकार अतिरिक्त लागत का भुगतान करेगी। MSMEs के लिए यह कवरेज ₹50 लाख प्रति एक्सपोर्टर तक सीमित है। कुल ₹497 करोड़ में से ₹282 करोड़ नॉन-ECGC द्वारा इंश्योर्ड MSMEs के लिए रखे गए हैं। यह कदम ऐसे समय आया है जब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों का ट्रैफिक काफी कम हो गया है और वॉर रिस्क प्रीमियम कई गुना बढ़ गए हैं।

भारत के व्यापार पर क्या होगा असर?

इस स्कीम के पीछे का बड़ा कारण भारत के व्यापार पर पड़ रहा गहरा असर है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, जो दुनिया भर के तेल और कमोडिटीज के लिए एक अहम रास्ता है, के बाधित होने से बड़े आर्थिक प्रभाव पड़ रहे हैं। भारत, जो अपने कच्चे तेल का 80% से अधिक आयात करता है, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और आयात बिलों के प्रति बहुत संवेदनशील है। इसका असर भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट में देखने को मिला है, जो फरवरी 2026 में लगभग दोगुना होकर $27.1 बिलियन तक पहुंच गया। सप्लाई चेन और एनर्जी कॉस्ट पर भू-राजनीतिक जोखिमों का बढ़ना इस समस्या को और बढ़ा रहा है। हालांकि वैश्विक एक्सपोर्ट क्रेडिट एजेंसियां भी बीमा देती हैं, लेकिन भारत का यह RELIEF पैकेज एक्सपोर्टर्स को तत्काल लागत वृद्धि से निपटने में मदद करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी हस्तक्षेप है।

क्या यह काफी होगा? चुनौतियां और चिंताएं

हालांकि, यह राहत पैकेज जरूरी है, लेकिन अगर गल्फ संकट लंबा खिंचता है तो ₹497 करोड़ का यह फंड कम पड़ सकता है। इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपिंग ट्रैफिक में आई कमी जैसी समस्याएं ऐसी हैं जिनका समाधान सिर्फ पैकेजों से नहीं हो सकता। भारत की इंपोर्टेड एनर्जी पर भारी निर्भरता लगातार ऊंची तेल और शिपिंग लागत का कारण बन सकती है, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है और महंगाई भी बढ़ सकती है। यह स्कीम मुख्य रूप से इंश्योरेंस और फ्रेट लागतों पर केंद्रित है, लेकिन यह मांग में गिरावट, कच्चे माल की कमी या वैश्विक व्यापार में लंबे समय तक मंदी जैसी समस्याओं से सीधे नहीं निपटती। साथ ही, प्रमुख समुद्री बीमाकर्ता भू-राजनीतिक जोखिमों की कीमतों को एडजस्ट कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि संकट के तुरंत बाद भी लागतें ऊंची बनी रह सकती हैं।

आगे की राह: स्थिति पर पैनी नजर

RELIEF पहल को एक अल्पकालिक उपाय के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका लक्ष्य अनिश्चितता भरे इस दौर में एक्सपोर्ट फ्लो को स्थिर करना और एक्सपोर्टर्स का भरोसा बढ़ाना है। विभिन्न मंत्रालयों का एक समूह इस स्थिति पर रोजाना नजर रख रहा है और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने पर रणनीतियों को एडजस्ट करने के लिए तैयार है। इस स्कीम का उद्देश्य ऑर्डर कैंसिलेशन को रोकना, एक्सपोर्ट-डिपेंडेंट सेक्टर्स में नौकरियों की सुरक्षा करना और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को मजबूत करना है। यह कदम इन बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार की सक्रियता को दर्शाता है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.