भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड और डिफेंस डील के लिए बातचीत तेज हो गई है। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल और USTR जैमिसन ग्रीर के बीच मिलवॉकी में अहम बैठक हुई है, लेकिन रूस से ऊर्जा आयात को लेकर अमेरिका का नया कानून इस डील की राह में बड़ी चुनौती बन गया है।
व्यापार का लक्ष्य और रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 30 सितंबर, 2026 को हुई बातचीत के बाद, भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस, एनर्जी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर खास जोर दिया जा रहा है। दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $500 बिलियन तक पहुंचाना है।
मिलवॉकी में चल रही बातचीत
कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल फिलहाल अमेरिका में हैं और G20 ट्रेड मिनिस्टर्स की बैठक के दौरान USTR जैमिसन ग्रीर के साथ चर्चा कर रहे हैं। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य एक 'इंटिरिम ट्रेड एग्रीमेंट' को अंतिम रूप देना है, ताकि दोनों देशों के बिजनेस के लिए मार्केट एक्सेस आसान हो सके।
बड़ा रिस्क: टैरिफ का संकट
हालांकि, इस डील की राह में अमेरिका का नया कानून 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' बड़ी बाधा बन गया है। इस एक्ट के तहत, जो देश रूस से तेल और गैस का बड़ा आयात जारी रखेंगे, उन पर अमेरिका 100% तक टैरिफ लगा सकता है। भारत के लिए यह एक बड़ी मुश्किल है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से बड़ा आयात करता है। निवेशक अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि बातचीत के दौरान इस मुद्दे को कैसे सुलझाया जाएगा।
भविष्य की रूपरेखा
डिफेंस और टेक्नोलॉजी के अलावा, सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई करना दोनों देशों की प्राथमिकता है। जल्द ही अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो की नई दिल्ली यात्रा प्रस्तावित है, जिससे इंडो-पैसिफिक सुरक्षा सहयोग को और स्पष्ट दिशा मिलेगी। फिलहाल, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर के एक्सपोर्टर्स के लिए यह ट्रेड डील काफी मायने रखती है, जबकि एनर्जी सेक्टर पर मंडरा रहे टैरिफ रिस्क से बाजार में सतर्कता बनी हुई है।
