भारत-अमेरिका में बड़ा ट्रेड एग्रीमेंट, द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगी रफ्तार
दोनों देशों के बीच यह नया ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस डील के जरिए 2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर के पार ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जो वर्तमान से दोगुने से भी ज्यादा है। समझौते की मुख्य बातों में भारतीय एक्सपोर्ट (Export) को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18% तक करना शामिल है। यह एक अंतरिम समझौता (Interim Agreement) है जिसे भारतीय अधिकारी अंतिम रूप दे रहे हैं, और यह पिछले साल हुई वार्ताओं पर आधारित है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (U.S. Trade Representative) का दफ्तर इसे ठोस व्यवस्थाओं की ओर एक कदम बता रहा है।
टैरिफ कटौती से भारतीय सामानों को मिलेगी बड़ी राहत
यह नया 18% टैरिफ दर भारतीय सामानों को कुछ क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर स्थिति में लाती है। इससे पहले, भारत को 25% या कुछ मामलों में 50% तक का टैरिफ झेलना पड़ता था, जिससे इंडोनेशिया (19%) और वियतनाम (20%) जैसे देशों की तुलना में उसे नुकसान होता था। यूएस (US) व्यापार नीति में आपसी तालमेल को प्राथमिकता देने के चलते, यह बदलाव प्रतिस्पर्धा को बराबर करने का प्रयास है। समझौते में अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने की भारत की प्रतिबद्धता भी बताई गई है, जो आपसी मार्केट एक्सेस (Market Access) का संकेत देता है।
अभी भी कई सवालों के जवाब बाकी
हालांकि, इस सकारात्मक घोषणा के बावजूद, कई अहम सवाल अभी भी बने हुए हैं, जिस कारण ट्रेड विश्लेषक (Trade Analysts) सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। एक औपचारिक संयुक्त बयान, बातचीत का लिखित मसौदा या स्पष्ट प्रवर्तन तंत्र (Enforcement Mechanism) की कमी इस डील की अंतिम रूपरेखा को लेकर चिंता पैदा करती है। 500 अरब डॉलर का महत्वाकांक्षी व्यापार लक्ष्य संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है; भारत का अमेरिका से वर्तमान वार्षिक इम्पोर्ट (Import) 50 अरब डॉलर से भी कम है, ऐसे में यह आंकड़ा एक ठोस प्रतिबद्धता के बजाय एक उम्मीद जैसा लगता है। व्यापार डील को रूसी तेल की खरीद रोकने की भारत की प्रतिबद्धता से जोड़ना इसके लेन-देन वाले स्वभाव को उजागर करता है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को जटिल बना सकता है।
जीडीपी (GDP) ग्रोथ को मिल सकती है अतिरिक्त गति
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह ट्रेड डील भारत के आर्थिक विकास को एक खास गति दे सकती है, अनुमान है कि इससे मध्यम अवधि में जीडीपी (GDP) ग्रोथ में 0.20-0.25% अंकों की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस (Moody's Investors Service) ने टैरिफ में इस छूट को भारत के श्रम-प्रधान निर्यात क्षेत्रों, जैसे कपड़ा और फार्मास्यूटिकल्स के लिए क्रेडिट-पॉजिटिव (Credit-Positive) बताया है, जो बेहतर अमेरिकी मार्केट एक्सेस (Market Access) से सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे। आईटी (IT) सेक्टर भी व्यापारिक तनाव कम होने से लाभ की उम्मीद कर रहा है, जिससे बड़े आउटसोर्सिंग सौदों (Outsourcing Deals) पर बातचीत आसान हो सकती है।
