बाजारों में आई खुशी की लहर
यह बड़ा समझौता कई महीनों से चल रहे टैरिफ को लेकर तनाव के बाद हुआ है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है। टैरिफ में हुई यह कटौती भारतीय सामानों को अमेरिकी मार्केट में ज्यादा कंपीटिटिव बनाएगी, जिससे एक्सपोर्ट बढ़ने और कैपिटल इनफ्लो में बढ़ोतरी की उम्मीद है। यह आने वाले और बड़े वार्ताओं का पहला पड़ाव माना जा रहा है।
बाजार का रिएक्शन: Nifty 50 रॉकेट, रुपया भी चमका
इस ट्रेड डील की खबर आते ही भारतीय शेयर बाजारों में तुरंत तेजी देखी गई। मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को, Nifty 50 इंडेक्स ट्रेडिंग के शुरुआती घंटों में ही लगभग 2.88% बढ़कर 25,811.40 पॉइंट पर पहुंच गया। इससे निवेशकों का सेंटिमेंट काफी पॉजिटिव हुआ। इसी के साथ, भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1% से ज्यादा मजबूत होकर 90.40 के करीब ट्रेड करने लगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस डील से भारतीय एसेट्स में फॉरेन इन्वेस्टमेंट आने की उम्मीद है, जो रुपये की कमजोरी को दूर करेगा।
टैरिफ में बड़ी राहत: किन सेक्टर्स को होगा फायदा?
अमेरिकी सामानों पर 50% से टैरिफ घटाकर 18% करना एक बड़ी राहत है। इससे पहले, अमेरिका ने भारत के रूसी तेल की खरीद पर 25% तक के टैरिफ लगाए थे। अब, भारत चीन जैसे देशों की तुलना में ज्यादा कंपीटिटिव पोजीशन में आ गया है, जिनके सामानों पर अमेरिका 34% तक टैरिफ लगाता है। इस डील से टेक्सटाइल और लेदर जैसे सेक्टरों में 20% तक की तेजी देखी गई। इसके अलावा, ऑटो, इंजीनियरिंग गुड्स और कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, अमेरिका का कहना है कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा और अमेरिका व वेनेजुएला से इम्पोर्ट बढ़ाएगा। इस पर अभी सवाल बने हुए हैं। अमेरिका भारत के साथ $1.3 बिलियन के एग्रीकल्चरल ट्रेड डेफिसिट का जिक्र कर रहा है और अपने कृषि उत्पादों (जैसे नट्स, कॉटन, सोयाबीन ऑयल) के लिए भारत को एक बड़े मार्केट के तौर पर देख रहा है। लेकिन, भारत के लिए एग्रीकल्चर एक सेंसिटिव सेक्टर है और मार्केट एक्सेस की पूरी डीटेल अभी साफ नहीं है। राष्ट्रपति की ओर से बताई गई $500 बिलियन की अमेरिकी सामानों की खरीद एक बड़ा लक्ष्य है, न कि तत्काल प्रतिबद्धता। इस डील में भारत की ओर से अमेरिकी पेट्रोलियम, डिफेंस गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और एयरक्राफ्ट खरीदने की भी प्रतिबद्धताएं शामिल हैं। इस समझौते ने द्विपक्षीय संबंधों में आई तल्खी को खत्म करने में मदद की है।
भविष्य की राह
इस शुरुआती समझौते को एक कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग स्टेप माना जा रहा है, जो आगे चलकर मजबूत आर्थिक साझेदारी का रास्ता खोल सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कम अनिश्चितता और बेहतर वैल्यूएशन्स के कारण फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की रुचि फिर से बढ़ सकती है, जिससे भारतीय इक्विटी में और तेजी आ सकती है। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर का मानना है कि बेहतर मार्केट एक्सेस, कैपिटल फ्लो और ट्रेड बैरियर्स कम होने से FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 7.4% के करीब पहुंच सकती है। दोनों देशों के बीच एक व्यापक डील के लिए बातचीत जारी रहने की उम्मीद है।