भारत-अमेरिका व्यापार डील: तेल पर अमेरिका का दबाव, गोयल ने 'पुनर्संतुलन' का दिया हवाला!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारत-अमेरिका व्यापार डील: तेल पर अमेरिका का दबाव, गोयल ने 'पुनर्संतुलन' का दिया हवाला!
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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने पर जताई जा रही चिंताओं के बीच स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यापार समझौते में 'रियायतों के पुनर्संतुलन' (re-balancing of concessions) का प्रावधान होता है। यह बयान भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के बीच आया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को तत्काल टैरिफ में कटौती का लाभ मिला है और द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि की उम्मीद जगी है, हालांकि तेल को लेकर कुछ सवाल अभी भी बाकी हैं।

भारत, अमेरिका की संभावित सख्ती से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौतों में मौजूद सुरक्षा उपायों का सहारा ले रहा है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा है कि विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों सहित सभी व्यापारिक समझौतों में 'रियायतों के पुनर्संतुलन' की व्यवस्था होती है। इसका मतलब है कि अगर कोई देश बाद में ऐसी कार्रवाई करता है जिससे व्यापार समझौते के तहत मिलने वाले लाभ पर नकारात्मक असर पड़े, तो दूसरे देश को भी अपनी रियायतों को समायोजित करने का अधिकार मिल जाता है।

दरअसल, अमेरिका भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद जारी रखने को लेकर टैरिफ में मिली छूट से जोड़ रहा है। वाशिंगटन ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर भारत यह खरीद जारी रखता है, तो पुरानी टैरिफ दरें फिर से लागू की जा सकती हैं। हालांकि, हाल ही में सील हुए अंतरिम व्यापार समझौते में भारत के लिए कुछ राहत की गुंजाइश दिख रही है।

निर्यातकों को मिली बड़ी राहत

भारत के श्रम-गहन (labour-intensive) वस्तुओं के निर्यातकों को इस समझौते से तत्काल फायदा हुआ है। इन वस्तुओं पर टैरिफ को 50% से घटाकर 25% कर दिया गया है, जो 7 फरवरी से प्रभावी है। आने वाले दिनों में इसे और घटाकर 18% तक लाने पर भी सहमति बनी है। गोयल ने भरोसा जताया है कि आपसी टैरिफ में कमी के कारण अमेरिका के साथ भारत का कुल व्यापार काफी बढ़ेगा। इससे भारतीय उत्पादों को चीन जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में एक मजबूत बढ़त मिलेगी और देश में निवेश भी आकर्षित होगा।

अमेरिका से आयात की प्रतिबद्धता

मंत्री ने अमेरिका से अगले पांच साल में $500 अरब मूल्य का सामान आयात करने की भारत की प्रतिबद्धता पर भी बात की। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी और कोकिंग कोल जैसे उत्पाद शामिल हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर भारत का इन श्रेणियों में मौजूदा आयात बिल लगभग $300 अरब सालाना है, जो अगले पांच साल में बढ़कर $2 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धी मूल्य और गुणवत्ता के लिए अमेरिका से खरीद बढ़ाना और आयात के स्रोतों में विविधता लाना है।

तेल को लेकर चिंताएं बरकरार

इन सबके बावजूद, निर्यातकों के मन में अमेरिका के एक कार्यकारी आदेश (executive order) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जिसमें रूस से तेल की खरीद बंद करने की भारत की प्रतिबद्धता को टैरिफ में 25% की कटौती वापस लेने की शर्त से स्पष्ट रूप से जोड़ा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह चेतावनी कि अगर आयात फिर से शुरू हुआ तो शुल्क फिर से लगाए जा सकते हैं, एक छाया की तरह बनी हुई है। हालांकि, समझौते के ढांचे में ही एक धारा है जो कहती है कि यदि कोई भी देश सहमत टैरिफ में बदलाव करता है, तो दूसरा देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं को समायोजित कर सकता है। यह एक संभावित रास्ता प्रदान करता है, जिससे परिस्थितियां बदलने पर बातचीत की जा सकती है।

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