रणनीतिक बदलाव: सिर्फ टैरिफ कट से कहीं बढ़कर
अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ (tariff) में भारी कटौती का ऐलान हुआ है। पहले जो टैरिफ 50% था, अब उसे घटाकर 18% कर दिया गया है। इस फैसले ने भारतीय शेयर बाजारों में तूफानी तेजी ला दी है, और यह इंडिया-यूएस (India-US) के बीच एक बड़ी स्ट्रैटेजिक शिफ्ट (strategic shift) का संकेत भी है। इसका मकसद ग्लोबल सप्लाई चेन (supply chain) को मजबूत करना और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब (manufacturing hub) के तौर पर स्थापित करना है।
किन सेक्टरों को मिली बड़ी राहत?
खासकर टेक्सटाइल (textile), लेदर (leather), जेम्स एंड ज्वैलरी (gems and jewellery) और मरीन एक्सपोर्ट (marine exports) जैसे सेक्टरों के लिए यह 18% का टैरिफ रेट काफी राहत भरा है। जानकारों का कहना है कि यह दर वियतनाम (Vietnam) के 20%, साउथ-ईस्ट एशिया (Southeast Asia) के 19% और यूरोपीय यूनियन (EU) के 15% की तुलना में काफी कॉम्पिटिटिव (competitive) है, जबकि चीन (China) का टैरिफ 47.5% तक है। अमेरिका भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (merchandise exports) का लगभग 20% हिस्सा लेता है, ऐसे में यह बदलाव ग्रोथ के लिए बेहद अहम है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
सीआईआई (CII) प्रेसिडेंट राजीव मेमानी के मुताबिक, इस डील से एक बड़ा 'टैरिफ ओवरहैंग' (tariff overhang) हट गया है, जिससे भारत की ग्रोथ स्टोरी को नई दिशा मिली है और यह 'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल के साथ भी पूरी तरह तालमेल बिठाती है। भारत फोर्ज (Bharat Forge) के वाइस चेयरमैन अमित कल्याण ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और बढ़ाने के लिए 'बिल्डिंग ब्लॉक्स' (building blocks) का काम करेगा, जिससे लॉन्ग-टर्म (long-term) एंगेजमेंट में स्पष्टता आएगी।
सेक्टोरल बूस्ट और उभरते अवसर
गहने और आभूषण (Gems and Jewellery) सेक्टर पर खास असर देखा जा सकता है, जहां हाई ड्यूटी (high duty) के कारण पिछले नौ महीनों में डायमंड (diamond) एक्सपोर्ट में 60% तक की गिरावट आई थी। अब 18% टैरिफ से इस सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, टेक्सटाइल और अपैरल (apparel) स्टॉक्स में भी तेज उछाल देखा गया, कई तो अपर सर्किट (upper circuit) पर पहुंच गए। डिफेंस (defence) सेक्टर भी अपने कॉम्पोनेंट्स (components) और सबसिस्टम्स (subsystems) के लिए यूएस (US) की टेक्नोलॉजी (technology) के साथ तालमेल बिठाकर बड़ा अवसर देख रहा है।
बाजार में तूफानी तेजी और रुपये में मजबूती
इस डील की घोषणा के बाद शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। एक ही सेशन में बाजार की वैल्यू (Market Capitalization) में ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा का इजाफा हुआ, और सेंसेक्स (Sensex) व निफ्टी (Nifty) जैसे प्रमुख सूचकांक लगभग 2.5% चढ़ गए। भारतीय रुपये में भी डॉलर के मुकाबले मजबूती देखी गई।
आगे का रास्ता: इम्प्लीमेंटेशन और संभावनाएं
हालांकि, बाजार की इस सकारात्मक प्रतिक्रिया के बीच, कोटक एएमसी (Kotak AMC) के एमडी निलेश शाह (Nilesh Shah) जैसे एक्सपर्ट्स का कहना है कि 'डेविल इज इन द डिटेल्स' (devil is in the details), यानी असली फायदा तो डील के इम्प्लीमेंटेशन (implementation) और बाकी बचे बारीक पहलुओं पर निर्भर करेगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि इस डील से भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ में 0.2% से 0.3% तक का इजाफा हो सकता है, जिससे यह 7% के करीब पहुंच सकती है। इस समझौते के तहत भारत रूसी तेल (Russian oil) की खरीद कम कर सकता है, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट (energy market) में भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।