अगस्त 2026 तक, भारतीय बिज़नेस जगत में कई बड़े डेवलपमेंट देखने को मिल रहे हैं। देश की टॉप फैमिली-रन फर्म्स का कुल वैल्यूएशन **$1.46 ट्रिलियन** यानी लगभग **₹1.46 लाख करोड़** तक पहुंच गया है, जो 2024 से **27.5%** की बढ़त दर्शाता है। वहीं, ISRO अब अमेरिका के साथ मिलकर मून बेस प्रोग्राम का हिस्सा बन गया है। इसके अलावा, सरकार ने पॉलिमर नोटों की टेस्टिंग शुरू की है और तेजी से नए कानून भी पास किए जा रहे हैं।
भारतीय फैमिली बिज़नेस में जोरदार तेजी
भारतीय बिज़नेस परिदृश्य में एक बड़ी खबर आई है। देश की टॉप 300 फैमिली-रन कंपनियों का कुल वैल्यूएशन अब $1.46 ट्रिलियन (लगभग ₹1.46 लाख करोड़) को पार कर गया है। यह 2024 के मुकाबले 27.5% की शानदार बढ़त है। यह प्रदर्शन तब और भी खास हो जाता है जब हम देखते हैं कि इसी दौरान Nifty 50 और Sensex जैसे प्रमुख इंडेक्स में उतार-चढ़ाव रहा है। इन कंपनियों ने ₹56 लाख करोड़ का सालाना रेवेन्यू जेनरेट किया है और 5.4 मिलियन लोगों को रोजगार दिया है। निवेशक इन बड़ी फैमिली ग्रुप्स को भारतीय शेयर बाज़ार के हेल्थ का एक अहम पैमाना मानते हैं।
ISRO का मून मिशन में बड़ा कदम
एयरोस्पेस सेक्टर के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) को अमेरिका के नेतृत्व वाले NASA के मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता मिला है। आर्टेमिस एकॉर्ड्स के तहत हुए इस समझौते से भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी और रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। भारतीय मार्केट के लिए, यह देश की इंजीनियरिंग, डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है, जो ISRO के मिशन के लिए सप्लाई चेन का हिस्सा हैं।
तेज विधायी सत्र और पॉलिमर करेंसी
पॉलिसी के मोर्चे पर, लोकसभा ने अपने हालिया सत्र में 9 नए बिल पास किए हैं। कई बिलों का 10 मिनट से भी कम समय में पास होना संसदीय प्रक्रिया पर चर्चा का विषय रहा है। इन कानूनों का असर बैंकिंग, टैक्सेशन और MSME जैसे कई सेक्टर्स पर पड़ेगा। ऐसे में निवेशकों को इन नए नियमों और उनके लागू होने की टाइमलाइन पर करीब से नजर रखनी होगी।
इसके अलावा, सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ₹10 और ₹20 के 1 अरब पॉलिमर बैंकनोट्स के फील्ड ट्रायल की योजना को हरी झंडी दे दी है। यह कदम करेंसी की ड्यूरेबिलिटी और सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। हालांकि, अभी इस पर ज्यादा वित्तीय जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन पॉलिमर नोटों का आना मार्केट की नजर में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जिससे सुरक्षा छपाई और करेंसी मैनेजमेंट की लागत पर असर पड़ सकता है।
