India-UK Trade Deal: ब्रांड्स भारत में, पर दाम जस के तस! जानें क्या है वजह

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AuthorMehul Desai|Published at:
India-UK Trade Deal: ब्रांड्स भारत में, पर दाम जस के तस! जानें क्या है वजह

भारत और यूके के बीच हुआ ट्रेड एग्रीमेंट कई ब्रिटिश ब्रांड्स को भारतीय बाज़ार में लाने में मदद कर रहा है, लेकिन आम ग्राहकों को कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिल रही है। इंपोर्ट ड्यूटी कम होने के बावजूद, रुपए की कमजोरी और शिपिंग की ऊंची लागत ने रिटेल प्राइस को हाई रखा है।

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट के चलते कई ब्रिटिश ब्रांड्स, खासकर प्रीमियम ब्यूटी, फैशन और फ़ूड सेक्टर के, भारतीय बाज़ार में दस्तक दे रहे हैं। हालांकि, इस समझौते से इंपोर्ट ड्यूटी तो कम हुई है, पर ग्राहकों को रिटेल कीमतों में राहत मिलने की उम्मीदें अभी पूरी नहीं हो रही हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ बाहरी फैक्टर इस कमी को पूरा कर रहे हैं, जिससे खरीदारों को खास फायदा नहीं हो रहा है।

रुपए की चाल और लॉजिस्टिक्स का खेल

कीमतें कम न होने की एक बड़ी वजह है भारतीय रुपए का प्रदर्शन। पिछले एक साल में, रुपया ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले करीब 12% कमजोर हुआ है। इस वजह से इंपोर्ट होने वाले सामान की लागत काफी बढ़ गई है, जिससे कस्टम ड्यूटी में हुई कटौती का फायदा बेअसर हो गया है। कई कंपनियां ग्राहकों को छूट देने के बजाय, इस कटौती का इस्तेमाल बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों को संभालने में कर रही हैं।

इसके अलावा, ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतें भी लागत को और बढ़ा रही हैं। पश्चिम एशिया में शिपिंग रूट में चल रही रुकावटों के कारण, कई इंपोर्टर्स समुद्री माल ढुलाई (sea freight) की जगह एयर कार्गो (air cargo) का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह तरीका काफी महंगा है और इससे प्रोडक्ट की फाइनल कॉस्ट बढ़ जाती है। रिटेलर्स के लिए, लॉजिस्टिक्स का यह बढ़ा हुआ खर्च उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना रहा है, जिससे वे ग्राहकों के लिए MRP कम नहीं कर पा रहे हैं।

ब्रिटिश ब्रांड्स की स्ट्रेटेजिक एंट्री

इन लागत की बाधाओं के बावजूद, ब्रिटिश कंपनियां भारतीय बाज़ार में दिलचस्पी दिखा रही हैं। ट्रेड डील ने कई ब्रांड्स के लिए मार्केट में एंट्री के बाद ऑपरेशन्स को बड़े पैमाने पर करने की बातचीत शुरू कर दी है। ऑनलाइन मार्केटप्लेस से मिली जानकारी के अनुसार, यूके-बेस्ड स्किनकेयर, बॉडी केयर और वेलनेस फर्म्स की पूछताछ बढ़ी है। उदाहरण के लिए, Kindlife जैसे प्लेटफॉर्म अगले 6 से 9 महीनों में भारत में एक दर्जन से ज्यादा नए ब्रिटिश ब्रांड्स लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं। ये नए प्रोडक्ट्स ज्यादातर ₹700 से ₹1,500 के मिड-प्रीमियम प्राइस रेंज में होंगे, जो भारत में हाई-क्वालिटी कंज्यूमर गुड्स की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

सेक्टर-स्पेसिफिक ग्रोथ और भविष्य

लग्जरी और फ़ूड रिटेल सेक्टर्स में भी अच्छी हलचल देखने को मिल रही है। लग्जरी वॉच सेगमेंट के रिटेलर्स को उम्मीद है कि बेहतर ट्रेड माहौल छोटे, खास ब्रिटिश लग्जरी ब्रांड्स को भारत में आने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसी तरह, फ़ूड एंड बेवरेज सेक्टर में भी सीधे विस्तार हो रहा है। Ben’s Cookies जैसी बेकरी चेन्स इस फाइनेंशियल ईयर में लगभग एक दर्जन नए आउटलेट खोलने की योजना बना रही हैं।

निवेशकों के लिए, यह देखना अहम होगा कि जैसे-जैसे ट्रेड बैरियर्स कम हो रहे हैं, क्या ये कंपनियां अपने प्रॉफिट को बढ़ा पाती हैं। हालांकि, तत्काल कीमतों में कटौती की संभावना कम है, लेकिन इन ब्रांड्स की लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिव पोजीशन इस बात पर निर्भर करेगी कि वे करेंसी के जोखिमों को कैसे मैनेज करते हैं और सप्लाई चेन को कैसे स्थिर रखते हैं, खासकर जब ग्लोबल शिपिंग कॉस्ट में अस्थिरता बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.