India-UK Trade Deal: भारतीय फार्मा एक्सपोर्टर्स के लिए खुशखबरी, ब्रिटेन में अब 'जीरो ड्यूटी' पर बिकेगा सामान

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India-UK Trade Deal: भारतीय फार्मा एक्सपोर्टर्स के लिए खुशखबरी, ब्रिटेन में अब 'जीरो ड्यूटी' पर बिकेगा सामान

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए नए ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) से भारतीय फार्मा और मेडिकल डिवाइस एक्सपोर्टर्स के लिए ब्रिटेन में 'जीरो ड्यूटी' यानी बिना टैक्स के एंट्री का रास्ता खुल गया है। इस डील का लक्ष्य भारत के मौजूदा **$1 बिलियन** के एक्सपोर्ट को बढ़ाना है, जिसके तहत **99%** प्रोडक्ट लाइन्स पर टैरिफ खत्म कर दिए गए हैं।

क्या है ये नई डील?

हाल ही में साइन किए गए इंडिया-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) भारतीय हेल्थकेयर एक्सपोर्टर्स के लिए एक बड़ी जीत है। इसके तहत अब भारतीय कंपनियां यूनाइटेड किंगडम में बिना किसी ड्यूटी के अपना सामान बेच सकेंगी। यह डील रेगुलेटरी बाधाओं को कम करेगी और लागत घटाएगी, जिससे भारतीय फर्में ब्रिटेन के लगभग $30 बिलियन के फार्मा इम्पोर्ट मार्केट में और बेहतर तरीके से मुकाबला कर सकेंगी। फिलहाल, भारत हर साल ब्रिटेन को लगभग $900 मिलियन की दवाएं और $130 मिलियन के मेडिकल डिवाइस एक्सपोर्ट करता है, और इस नई डील से इस आंकड़े में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

जेनेरिक दवा निर्माताओं को कैसे होगा फायदा?

CETA के प्रावधानों के तहत, भारतीय प्रोडक्ट लाइन्स के करीब 99% पर 'जीरो-ड्यूटी' एक्सेस मिलेगा, जिसमें 56 प्रमुख फार्मास्युटिकल टैरिफ लाइनें शामिल हैं। यह भारतीय जेनेरिक दवा निर्माताओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जो पहले से ही अपनी लागत-प्रभावशीलता के लिए जाने जाते हैं। जैसे-जैसे कई हाई-वैल्यू दवाओं के ग्लोबल पेटेंट एक्सपायर हो रहे हैं, भारतीय कंपनियां यूके मार्केट में किफायती विकल्प सप्लाई करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं। इसके अलावा, यूके चीन पर अपनी सप्लाई चेन की निर्भरता को कम करना चाहता है, ऐसे में मजबूत क्वालिटी स्टैंडर्ड बनाए रखने वाली भारतीय फर्में पसंदीदा पार्टनर के तौर पर उभर सकती हैं।

इंडस्ट्री की चिंताएं: 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' पर उठा सवाल

एक्सपोर्ट वॉल्यूम के पॉजिटिव आउटलुक के बावजूद, एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) ने ट्रेड के दुरुपयोग की आशंका जताई है। इंडस्ट्री प्रतिनिधियों ने भारतीय सरकार से 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' (Rules of Origin) को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि टैरिफ लाभ का फायदा तीसरी देश की मैन्युफैक्चरर्स, जैसे कि चीन, यूके के रास्ते स्थानीय ड्यूटी से बचने के लिए न उठा सकें। इंडस्ट्री बॉडीज ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत यूके-आधारित एक्सपोर्टर्स के लिए फैक्ट्री निरीक्षण करे ताकि समान अवसर बना रहे और प्रोडक्ट सेफ्टी स्टैंडर्ड्स कायम रहें।

हेल्थकेयर सहयोग का बड़ा दायरा

सिर्फ गुड्स के एक्सपोर्ट के अलावा, CETA फ्रेमवर्क में हेल्थकेयर सर्विसेज में गहरे सहयोग के प्रावधान भी शामिल हैं। इसमें भारतीय और यूके के अस्पतालों के बीच पार्टनरशिप, डिजिटल हेल्थ में ज्वाइंट वेंचर और क्लिनिकल रिसर्च में सहयोग का विस्तार शामिल है। यह एग्रीमेंट एजुकेशनल एक्सचेंज को भी बढ़ावा देता है, जिससे हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशंस को एक-दूसरे के बाजारों में अपनी ऑपरेशनल मौजूदगी बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

निवेशक अब इस एग्रीमेंट के इम्प्लीमेंटेशन फेज पर नजर रखेंगे, खासकर यह देखेंगे कि सरकार कस्टम्स सेफगार्ड्स (Customs Safeguards) के अनुरोधों को कैसे संबोधित करती है। साथ ही, यह भी मॉनिटर किया जाएगा कि क्या व्यक्तिगत फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस कंपनियां स्थापित ग्लोबल कॉम्पिटिटर्स के खिलाफ यूके में मार्केट शेयर हासिल करने के लिए इस 'जीरो-ड्यूटी' एक्सेस का सफलतापूर्वक लाभ उठा पाती हैं।

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