भारत और यूके के बीच नए ट्रेड एग्रीमेंट के बाद भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए अच्छी खबर है। इस डील से लगभग सभी तरह के टैरिफ खत्म हो गए हैं, जिससे उम्मीद है कि FY27 तक भारत से यूके को फार्मा एक्सपोर्ट में **10%** तक का इजाफा हो सकता है। इससे भारतीय जेनेरिक दवाओं और तैयार फॉर्मूलेशन की यूरोप के एक बड़े बाजार में कंपीटिटिवनेस बढ़ेगी।
भारतीय फार्मा सेक्टर को मिलेगी बड़ी संजीवनी
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) का भारतीय फार्मा सेक्टर पर बड़ा सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत, लगभग सभी दवा उत्पादों पर से ड्यूटी (टैरिफ) खत्म कर दी गई है। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स की लागत कम होगी और अगले दो सालों में यूके को होने वाले शिपमेंट में 10% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
एक्सपोर्ट कंपीटिटिवनेस में कैसे होगा सुधार?
टैरिफ का हटना भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए एक बड़ा रणनीतिक फायदा है। भारतीय जेनेरिक दवा उद्योग अपनी लागत-प्रतिस्पर्धा (cost competitiveness) के लिए जाना जाता है। ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (APIs), जेनेरिक्स और तैयार फॉर्मूलेशन के घरेलू निर्माता यूके मार्केट में और भी मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे। विश्लेषकों का मानना है कि इससे यूके की सरकारी खरीद प्रक्रियाओं (public procurement processes) में भी भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी, जो अक्सर बड़ी मात्रा और कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली होती हैं।
ऐतिहासिक प्रदर्शन पर एक नज़र
यूके, भारत के लिए यूरोप में सबसे बड़ा और दुनिया भर में तीसरा सबसे महत्वपूर्ण फार्मा एक्सपोर्ट मार्केट बना हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में, यूके को भारत का फार्मा एक्सपोर्ट लगभग $902.96 मिलियन था। यह पिछले साल की तुलना में 1.21% की मामूली गिरावट दर्शाता है, जबकि फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में 29.62% की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई थी। वर्तमान में, ड्रग फॉर्मूलेशन और बायोलॉजिक्स इस शिपमेंट का लगभग 90% हिस्सा हैं, जो बताता है कि हाई-वैल्यू वाले तैयार उत्पाद ही ट्रेड रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा लाते हैं।
फाइनेंशियल ईयर 27 में शुरुआती तेजी
हालिया ट्रेड डेटा से पता चलता है कि सेक्टर में रिकवरी शुरू हो गई है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के अप्रैल और मई महीनों के दौरान, यूके को एक्सपोर्ट बढ़कर $152.14 मिलियन हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि के $146.08 मिलियन की तुलना में 4.15% अधिक है। हालांकि यह वृद्धि भारत के कुल वैश्विक फार्मा एक्सपोर्ट का एक छोटा सा हिस्सा है, लेकिन यह ऊपर की ओर रुझान एक सकारात्मक संकेत है कि डील की उम्मीद में व्यापार बाधाओं को पहले से ही दूर किया जा रहा था।
संभावित जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें
हालांकि टैरिफ का खत्म होना एक अच्छी खबर है, निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां यूके और यूरोपीय बाजारों में रेगुलेटरी कंप्लायंस (regulatory compliance) को कैसे मैनेज करती हैं। कड़े गुणवत्ता मानक और खरीद नीतियों में संभावित बदलाव लंबे समय की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, कम टैरिफ मददगार तो हैं, लेकिन अंतिम लाभ कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन पर इस बात पर निर्भर करेगा कि वे स्थानीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कीमतों को कैसे स्थिर रख पाते हैं और सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स को कितनी प्रभावी ढंग से संभाल पाते हैं। निवेशक आने वाली तिमाहियों में यूके में अच्छी खासी कमाई वाली कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रख सकते हैं, ताकि यह देखा जा सके कि ट्रेड डील से एक्सपोर्ट वॉल्यूम में सुधार या मार्जिन में बढ़ोतरी होती है या नहीं।
