India-UK FTA लागू: व्यापार में ₹25 अरब का बूस्ट, जानें निवेशकों के लिए क्या है खास

INTERNATIONAL-NEWS
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
India-UK FTA लागू: व्यापार में ₹25 अरब का बूस्ट, जानें निवेशकों के लिए क्या है खास

भारत और यूके के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते का लक्ष्य दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार को **£25 अरब** तक बढ़ाना है। इसमें 99% भारतीय सामानों और 90% यूके एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ कम किए गए हैं।

व्यापार में आई नई क्रांति

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आधिकारिक तौर पर मंगलवार से लागू हो गया है। यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक बड़ा कदम है। इस व्यापक समझौते का मकसद सालाना द्विपक्षीय व्यापार को लगभग £25 अरब बढ़ाना है, जिससे यूके की इकोनॉमी को हर साल करीब £5 अरब का फायदा होने की उम्मीद है। टैरिफ में बड़ी कटौती और सरलीकरण से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश आसान होगा।

टैरिफ में कटौती और सेक्टर पर असर

इस समझौते का सबसे बड़ा असर आयात शुल्कों में कमी के रूप में दिखेगा। भारत ने स्कॉच व्हिस्की पर अपना आयात शुल्क 150% से घटाकर 75% कर दिया है। इससे भारतीय बाज़ार में प्रीमियम स्पिरिट्स की उपलब्धता बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धा भी तेज होगी। इसके अलावा, यूके से आयात होने वाली प्रीमियम कारों पर शुल्क 110% से घटाकर 10% कर दिया गया है। इन बदलावों का भारतीय लग्जरी कार और बेवरेज सेक्टर में काम कर रही कंपनियों की प्राइसिंग स्ट्रेटेजी पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यूके को होने वाले 99% भारतीय एक्सपोर्ट्स पर अब ड्यूटी-फ्री या काफी कम टैरिफ लगेगा, जिससे टेक्सटाइल और लेदर जैसे सेक्टर्स में भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को बड़ा फायदा मिल सकता है।

सेवाओं और निवेश का विस्तार

यह समझौता सिर्फ सामानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवाएं, सरकारी खरीद और निवेश जैसे 30 चैप्टर शामिल हैं। भारतीय एनिमेशन और गेमिंग कंपनियों के लिए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) की सुरक्षा को लेकर भी प्रावधान हैं, जिससे यूके की कंपनियों के साथ बेहतर सहयोग की उम्मीद है। यूके के व्यवसायों को भारत के £38 अरब के सरकारी खरीद बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इसके अलावा, एक सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट (SSA) भी लागू किया गया है, जिससे एक देश में अस्थायी रूप से काम करने वाले कर्मचारियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा देनदारियों का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। यह आईटी और कंसल्टिंग फर्मों के लिए कामकाज को आसान बनाएगा जिनके कर्मचारी अक्सर दूसरे देश में काम करते हैं।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

हालांकि, FTA ने विकास का एक ढांचा तैयार कर दिया है, लेकिन असली आर्थिक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां नए टैरिफ सिस्टम को कितनी जल्दी अपनाती हैं और क्या सप्लाई चेन मांग को पूरा करने के लिए तैयार हो पाती हैं। निवेशक यह देख सकते हैं कि भारतीय एक्सपोर्टर्स यूके में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नई ड्यूटी-फ्री एक्सेस का कितना लाभ उठा पाते हैं। घरेलू स्तर पर, लग्जरी कारों और स्पिरिट्स पर कम आयात शुल्क का असर स्थानीय प्रीमियम ब्रांड्स पर प्रतिस्पर्धा के दबाव का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, रिन्यूएबल एनर्जी, खासकर टर्बाइन और जेनरेटर के व्यापार में सहयोग की प्रगति पर भी नज़र रखनी होगी, क्योंकि कंपनियां व्यापार की आसान शर्तों का फायदा उठाना चाहेंगी।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.