India-UAE DigiLocker: डिग्री वेरिफिकेशन होगा आसान, लाखों भारतीयों को मिलेगा फायदा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India-UAE DigiLocker: डिग्री वेरिफिकेशन होगा आसान, लाखों भारतीयों को मिलेगा फायदा

भारत और UAE अब अकादमिक डिग्री के वेरिफिकेशन को तुरंत और सुरक्षित बनाने के लिए DigiLocker प्लेटफॉर्म को इंटीग्रेट कर रहे हैं। इस डिजिटल पहल का मकसद खाड़ी देश में जाने वाले हजारों भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए डॉक्यूमेंटेशन की दिक्कतों को कम करना है। यह समझौता हाल ही में नई दिल्ली में हुई भारत-UAE संयुक्त कांसुलर समिति की बैठक में फाइनल हुआ।

Detailed Coverage

अब डिग्री वेरिफिकेशन बनेगा सुपरफास्ट

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अकादमिक प्रमाण पत्रों के वेरिफिकेशन को आसान बनाने के लिए एक नई डिजिटल साझेदारी का ऐलान किया है। अब भारत के सरकारी DigiLocker प्लेटफॉर्म को UAE के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा। इसका मतलब है कि विदेशी डिग्री के सत्यापन के लिए जो मैन्युअल और समय लेने वाली प्रक्रियाएं होती थीं, वे खत्म हो जाएंगी। यह पहल भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे UAE में नौकरी या आगे की पढ़ाई के लिए जाना और आसान हो जाएगा।

लेबर मोबिलिटी पर बड़ा असर

यह डिजिटल इंटीग्रेशन दोनों देशों के बीच लेबर मोबिलिटी (श्रमिकों की आवाजाही) और कांसुलर सेवाओं को बेहतर बनाने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा है। UAE में काम करने वाली भारतीय कंपनियों और वहां पहले से मौजूद लाखों भारतीय कामगारों के लिए यह प्रशासनिक झंझटों को कम करेगा। UAE के एम्प्लॉयर्स अब भारतीय डिग्रियों की असलियत को सीधे तौर पर वेरिफाई कर पाएंगे, जिससे यह प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और कुशल बनेगी। इससे डॉक्यूमेंट अटेस्टेशन और बैकग्राउंड चेक से जुड़े खर्चों में भी कमी आ सकती है।

कांसुलर और आर्थिक संबंध होंगे मजबूत

नई दिल्ली में हुई भारत-UAE संयुक्त कांसुलर समिति की बैठक के दौरान, अधिकारियों ने लेबर मोबिलिटी, आपसी कानूनी सहायता और वीजा प्रोसेसिंग जैसे कई मुद्दों पर हुई प्रगति की समीक्षा की। डिजिटल सहयोग पर जोर देना इस बात को दर्शाता है कि दोनों देश अपनी सीमाओं के आर-पार टैलेंट के बड़े प्रवाह को प्रबंधित करने के लिए टेक्नोलॉजी का कैसे लाभ उठा रहे हैं। अबू धाबी में नवंबर 2025 में हुई पिछली बैठक के बाद, दोनों देशों ने अब इन डिजिटल और कानूनी ढांचों को प्रभावी बनाए रखने के लिए मासिक तकनीकी समीक्षाओं के लिए एक अधिक औपचारिक तंत्र स्थापित किया है।

भविष्य के कार्यान्वयन पर नजर

इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों डिजिटल सिस्टम कितनी तेजी और सटीकता से सिंक (Sync) होते हैं। हालांकि यह इंटीग्रेशन मुख्य रूप से एक सुविधा (facilitation) के तौर पर काम करेगा, लेकिन जिन सेक्टर्स में क्रॉस-बॉर्डर ह्यूमन कैपिटल (मानव संसाधन) पर ज्यादा निर्भरता है - जैसे आईटी सर्विसेज, कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर - वे इस बात पर नजर रखेंगे कि यह🇮🇳 भारतीय फर्मों के लिए भर्ती के समय और ऑपरेशनल लागत को कैसे कम करता है। अगले चरण में, पार्टिसिपेंट्स के लिए क्रॉस-बॉर्डर वेरिफिकेशन सर्विस का आधिकारिक रोलआउट होगा और उसके बाद स्टेकहोल्डर्स से डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग की स्पीड के बारे में फीडबैक लिया जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.