भारत सरकार अपने टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को नए मुकाम पर ले जाने के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) का जाल बिछा रही है। हाल ही में भारत-यूके के बीच हुए समझौते के बाद, सरकार की नजर 56 देशों पर है, ताकि दुनिया के **$900 अरब** के टेक्सटाइल इम्पोर्ट मार्केट में भारत की मौजूदा **4%** हिस्सेदारी को बढ़ाया जा सके। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, 6 सरकारी सेंटर्स को एक्सपोर्टर्स की मदद के लिए एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर्स में बदला जा रहा है।
ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट में भारत की नई उड़ान
केंद्र सरकार ग्लोबल टेक्सटाइल ट्रेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के नेटवर्क का विस्तार कर रही है। टेक्सटाइल मिनिस्टर गिरिराज सिंह ने हाल ही में बताया कि कैसे भारत, दुनिया के $900 अरब के टेक्सटाइल इम्पोर्ट मार्केट में अपनी मौजूदा 4% हिस्सेदारी को बढ़ाना चाहता है। 15 जुलाई से लागू हुए भारत-यूके FTA के तहत, भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को अब एक बड़ी अर्थव्यवस्था में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल रहा है, जो पहले सिर्फ 19 देशों तक सीमित था।
यूरोपियन यूनियन और न्यूजीलैंड से भी बनेंगे समझौते
सरकार का अगला फोकस यूरोपियन यूनियन (EU) और न्यूजीलैंड के साथ चल रही ट्रेड वार्ताओं को पूरा करने पर है। इन समझौतों के फाइनल होने के बाद, भारत का ट्रेड एग्रीमेंट्स नेटवर्क 56 देशों तक फैल जाएगा, जो वैश्विक टेक्सटाइल इम्पोर्ट का लगभग 60% हिस्सा कवर करेगा। इसका सीधा फायदा भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को मिलेगा, जिससे उन्हें हाई-डिमांड वाले बाजारों में अपनी पैठ बनाना आसान हो जाएगा।
अमेरिकी बाजार की चुनौतियाँ और रणनीति
हालांकि नए ट्रेड पैक्ट्स नए रास्ते खोल रहे हैं, लेकिन अमेरिका का बाजार भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए अभी भी एक जटिल क्षेत्र बना हुआ है। करीब $90 अरब से $100 अरब के इस बाजार में लगातार जांच और टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इन बाधाओं के बावजूद, अमेरिका को भारतीय टेक्सटाइल शिपमेंट में लचीलापन देखा गया है। एक अनुमान के मुताबिक, पहले जहाँ $11 अरब की कमी का अनुमान था, वहीं असल आंकड़ों में यह गिरावट लगभग $2 अरब तक सीमित रही। इस अस्थिरता से निपटने के लिए, सरकार भारतीय दूतावासों की मदद से लगभग 40 वैकल्पिक बाजारों को टारगेट करके अपने एक्सपोर्ट बेस को डाइवर्सिफाई कर रही है।
जमीनी स्तर पर एक्सपोर्टर्स को मदद
बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल ट्रेड के बीच की खाई को पाटने के लिए, सरकार छोटे व्यवसायों के लिए सपोर्ट बढ़ा रही है। वर्तमान में देश के 548 जिलों से टेक्सटाइल एक्सपोर्ट हो रहा है। छोटे प्लेयर्स की मदद के लिए, मिनिस्ट्री टेक्सटाइल डिपार्टमेंट, टेक्सटाइल कमेटी और टेक्सटाइल कमिश्नर के तहत 6 मौजूदा सेंटर्स को एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर्स में बदल रही है। इन सेंटर्स का काम नए एक्सपोर्टर्स को इंटरनेशनल ट्रेड की जटिलताओं, जैसे रजिस्ट्रेशन, जरूरी डॉक्यूमेंटेशन और FTA के फायदों को इस्तेमाल करने के लिए टेक्निकल रिक्वायरमेंट्स में मदद करना होगा। मिनिस्ट्री राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि स्थानीय एडमिनिस्ट्रेशन मौजूदा इंसेंटिव स्कीम्स के जरिए क्षेत्रीय एक्सपोर्टर्स की पहचान कर उन्हें सपोर्ट करें।
टेक्सटाइल सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, इन पहलों का लॉन्ग-टर्म असर इस बात पर निर्भर करेगा कि मैन्युफैक्चरर्स इन FTAs का कितना इस्तेमाल करते हैं और घरेलू फर्में ग्लोबल प्राइसिंग प्रेशर से कैसे निपट पाती हैं। सबसे अहम यह देखना होगा कि नए बाजारों में एक्सपोर्ट की मात्रा कितनी बढ़ती है और क्या ये फैसिलिटेशन सेंटर्स छोटे और मझोले उद्यमों (SMEs) के लिए ग्लोबल मार्केट में प्रवेश करने की लागत और समय को कम करने में प्रभावी साबित होते हैं।
