10 सितंबर को साउथ अफ्रीका का एक बिजनेस डेलिगेशन भारत आ रहा है। इस मिशन का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच के **$3.18 बिलियन** के ट्रेड डेफिसिट को कम करना और फार्मा व ऑटो सेक्टर में नई साझेदारी तलाशना है।
व्यापार का बदलता मॉडल
साउथ अफ्रीकन BRICS बिजनेस काउंसिल 10 और 11 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली का दौरा करेगी। अभी तक भारत और साउथ अफ्रीका के बीच व्यापार का मुख्य आधार कोयला, मैंगनीज और लकड़ी जैसे कच्चे माल (Raw Materials) की एक्सपोर्ट-इंपोर्ट रही है। अब नई रणनीति के तहत दोनों देश ग्रीन हाइड्रोजन, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे वैल्यू-एडेड सेक्टर में मिलकर काम करने पर जोर देंगे।
इंडिया-SACU ट्रेड एग्रीमेंट (PTA)
इस मिशन की पृष्ठभूमि में 12 अगस्त, 2026 को हुआ एक बड़ा समझौता है। भारत और Southern African Customs Union (SACU) ने एक Preferential Trade Agreement (PTA) के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस साइन किए हैं। इसका उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना है, ताकि दोनों देशों के बीच बिजनेस करना आसान हो सके। निवेशकों के लिए इस डील का प्रोग्रेस ट्रैक करना बहुत जरूरी है।
Solar Industries पर निवेशकों की नजर
इस बीच Solar Industries India Limited चर्चा में है। कंपनी ने हाल ही में Solar SA Investments (Pty) Ltd नाम से अपनी एक सहायक कंपनी बनाई है। कंपनी का Q1 FY27 नेट प्रॉफिट ₹653 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 92.6% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। हालांकि, हाल ही में कंपनी के साउथ अफ्रीका में किसी बड़े एक्विजिशन को लेकर मार्केट में अफवाहें उड़ी थीं, जिससे शेयर ₹21,645 के 52-वीक हाई पर पहुंच गया था। बाद में कंपनी ने स्पष्ट किया कि ये खबरें केवल अटकलें (Speculative) थीं।
चुनौतियां और रिस्क
साउथ अफ्रीका में बिजनेस करने के लिए अभी भी कुछ बड़ी चुनौतियां बाकी हैं। वहां ऊर्जा की कमी (Energy Shortage) और लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल सेक्टर में इंपोर्ट ड्यूटी 25% से बढ़कर 50% होने की चर्चा है, जो ऑटो एक्सपोर्टर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर डाल सकती है।
