भारत में विदेशी छात्रों की संख्या में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ है। 2023-24 में, देश ने **58,134** अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मेजबानी की, जो पिछले पाँच सालों में **19%** की बढ़ोतरी दर्शाता है। नेपाल अभी भी सबसे ज़्यादा छात्र भेजने वाला देश है, जबकि कर्नाटक विदेशी स्कॉलर्स के लिए सबसे पसंदीदा राज्य बनकर उभरा है।
पढ़ाई के लिए भारत का बढ़ता क्रेज़!
भारतीय उच्च शिक्षा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की रुचि लगातार बढ़ रही है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी 'ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन' (AISHE) के मुताबिक, 2023-24 अकादमिक वर्ष में कुल विदेशी छात्रों का नामांकन 58,134 तक पहुँच गया। यह आंकड़ा पिछले पाँच सालों में 18.9% की वृद्धि दिखाता है, यानी 2019-20 से 9,236 नए अंतरराष्ट्रीय छात्र जुड़े हैं।
कर्नाटक बना टॉप डेस्टिनेशन
भारतीय राज्यों की बात करें तो कर्नाटक अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सबसे बड़ा डेस्टिनेशन बन गया है, जहाँ 7,914 छात्र आए हैं। इसके बाद पंजाब का नंबर है, जहाँ 7,902 छात्रों ने दाखिला लिया है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी टॉप पाँच राज्यों में शामिल हैं। यह दिखाता है कि विदेशी छात्र उन जगहों पर ज़्यादा जा रहे हैं जहाँ अच्छी यूनिवर्सिटी और टेक्निकल एजुकेशन की सुविधा है।
डिग्री की पसंद और लिंग
सर्वे से पता चलता है कि ज़्यादातर विदेशी छात्र ग्रेजुएशन यानी अंडरग्रेजुएट कोर्स ( 73.6% ) करना पसंद करते हैं। पोस्ट-ग्रेजुएट प्रोग्राम में 16.8% छात्र आते हैं। बाकी डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और पीएचडी जैसे कोर्स में हैं। पिछले पाँच सालों में पुरुष छात्रों की संख्या 32,386 से बढ़कर 37,295 हुई है, और महिला छात्रों की संख्या 16,512 से बढ़कर 20,839 हो गई है।
'स्टडी इन इंडिया' का असर
इस बढ़ोतरी के पीछे सरकार की 'स्टडी इन इंडिया' पहल का भी बड़ा हाथ माना जा रहा है। 2018 में शुरू हुई इस पहल का मकसद भारत को एक ग्लोबल एजुकेशन हब बनाना है। इसने एडमिशन प्रोसेस को आसान बनाया है और भारतीय संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच ज़्यादा लोकप्रिय बनाया है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े निवेशकों के लिए यह एक अच्छा संकेत है। इससे प्राइवेट यूनिवर्सिटी, स्टूडेंट हॉस्टल और कोचिंग सेवाओं के बाज़ार में तेजी आने की उम्मीद है। कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों की लीड बनाए रखने की क्षमता, उनकी स्टूडेंट अकोमोडेशन की क्षमता और अकादमिक स्टैंडर्ड पर निर्भर करेगी। निवेशकों को इन टॉप राज्यों में प्राइवेट एजुकेशन ग्रुप्स के विस्तार पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या अक्सर बेहतर एजुकेशनल फैसिलिटी और मॉडर्न कैंपस की मांग बढ़ाती है।
