Japan-India Trade: दवाइयों के स्टैंडर्ड पर भारत की बड़ी मांग, ट्रेड गैप होगा कम?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Japan-India Trade: दवाइयों के स्टैंडर्ड पर भारत की बड़ी मांग, ट्रेड गैप होगा कम?

जापान दौरे पर भारतीय डेलिगेशन ने की फार्मा स्टैंडर्ड्स को लेकर बड़ी मांग। दोनों देशों के बीच आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस का लक्ष्य, ताकि भारत का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) कम हो सके। मिनिस्टर पियूष गोयल ने कहा, 2 महीने में आएंगे नए रेगुलेटरी बदलाव।

जापान के साथ ट्रेड को मिलेगी नई रफ्तार!

भारत और जापान के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। खास तौर पर भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए जापानी बाजार में एंट्री को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। टोक्यो में कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पियूष गोयल के साथ 200 सदस्यों वाले बिजनेस डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहे FICCI प्रेसिडेंट अनंत गोयनका ने दोनों देशों के बीच रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स (Regulatory Standards) को एक जैसा करने की मांग उठाई है।

फार्मा कंपनियों के लिए बड़ी खबर

अगर दोनों देश क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को आपसी मान्यता देते हैं, तो यह भारतीय दवा कंपनियों के लिए एक बड़ी जीत होगी। अभी तक जापानी मार्केट में अपनी दवाओं को रजिस्टर कराना भारतीय कंपनियों के लिए काफी मुश्किल और लंबा प्रोसेस रहा है, जिसने उनके एक्सपोर्ट (Export) को सीमित कर रखा था। स्टैंडर्ड्स अलाइनमेंट से यह प्रक्रिया आसान हो सकती है और भारतीय कंपनियों के एक्सपोर्ट रेवेन्यू (Export Revenue) में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।

सरकार का बड़ा ऐलान

मिनिस्टर पियूष गोयल इस बातचीत में काफी सक्रिय नजर आए। उन्होंने ऐलान किया है कि भारतीय सरकार अगले दो महीनों के भीतर नए रेगुलेशंस (Regulations) लाएगी या मौजूदा नियमों में बदलाव करेगी। इन बदलावों का मकसद जापानी निवेशकों के सामने आ रही दिक्कतों को दूर करना है, जो भारत को एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग हब (Manufacturing Hub) के तौर पर देख रहे हैं। इन प्रक्रियाओं को सरल बनाकर सरकार न सिर्फ ज्यादा फॉरेन इन्वेस्टमेंट (Foreign Investment) को आकर्षित करना चाहती है, बल्कि जापान में भारतीय सामानों की पहुंच को बेहतर बनाने की कोशिश भी कर रही है।

निवेशकों के लिए जरूरी बात

हालांकि, जापानी फार्मा मार्केट में एंट्री का विचार आकर्षक है, लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि वहां बिजनेस का माहौल काफी अलग है। जापानी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स दुनिया के सबसे सख्त स्टैंडर्ड्स में से हैं। रेगुलेटरी अलाइनमेंट के बावजूद, भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को कंपीट करने के लिए अपने प्रोडक्शन की क्वालिटी को बहुत ऊंचे स्तर पर बनाए रखना होगा। स्टैंडर्ड्स को एक जैसा करना एक अच्छा कदम है, पर यह तुरंत बड़े वॉल्यूम ग्रोथ की गारंटी नहीं देता।

ट्रेड डेफिसिट पर भी फोकस

यह डिप्लोमैटिक और बिजनेस आउटरीच (Business Outreach) भारत और जापान के बीच बढ़ते ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को भी संबोधित करता है। हालांकि द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा है, लेकिन यह एकतरफा रहा है, जिसमें जापान से भारत में अधिक सामान आता है। फार्मा, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव और क्लीन एनर्जी जैसे सेक्टर्स पर ध्यान केंद्रित करके, दोनों देश एक अधिक संतुलित व्यापारिक संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

आगे क्या?

निवेशकों को अगले दो महीनों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, जब भारतीय सरकार वादा किए गए रेगुलेटरी अमेंडमेंट्स (Regulatory Amendments) को लागू करना शुरू करेगी। इन पॉलिसी बदलावों की स्पीड और क्वालिटी यह बताएगी कि दोनों देश अपने ट्रेड गैप्स (Trade Gaps) को कितनी प्रभावी ढंग से भर पाते हैं। इसके अलावा, फार्मा स्टैंडर्ड्स को लेकर जापानी रेगुलेटर्स की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर नजर रखना, इस सेक्टर की लॉन्ग-टर्म एक्सपोर्ट पोटेंशियल (Export Potential) के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.