व्यापार में भारी उछाल, पर घाटे का बोझ?
India और Russia का लक्ष्य है कि 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार $100 अरब डॉलर तक पहुंच जाए। हाल के वर्षों में यह व्यापार 5 गुना से भी ज्यादा बढ़ा है, जो 2021 में $13 अरब डॉलर था, वह अब 2024-25 तक $68 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। मगर, इस ग्रोथ के साथ एक बड़ी समस्या भी सामने आई है। India का ट्रेड डेफिसिट 9 गुना बढ़कर $6.6 अरब से $58.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण है Russia से भारी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदना, जो Financial Year 2026 तक Russia से होने वाले कुल आयात का 84% हिस्सा है। एक संतुलित साझेदारी के लिए, दोनों देशों को अब सिर्फ एनर्जी (Energy) पर निर्भरता छोड़कर फार्मा (Pharmaceuticals), एग्रीकल्चर (Agriculture), मिनरल्स (Minerals) और इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) जैसे क्षेत्रों में भी व्यापार बढ़ाना होगा।
वैश्विक दबाव और India की एनर्जी स्ट्रेटेजी
यह बढ़ता व्यापारिक संबंध ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भू-राजनीतिक (Geopolitical) उथल-पुथल से गुजर रही है, जिसमें Russia पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध (Sanctions) और पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ता तनाव शामिल है। India अपनी स्वतंत्र विदेश नीति (Independent Foreign Policy) पर कायम है और अपनी एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) को प्राथमिकता दे रहा है। Russia, जिसके यूरोपीय बाजारों तक पहुंच सीमित हो गई है, ने अपने एनर्जी एक्सपोर्ट (Energy Exports) को एशिया की ओर मोड़ दिया है, जिसमें India एक अहम ग्राहक बनकर उभरा है। इससे वैश्विक बाजार की अस्थिरता और राजनीतिक दबावों के बावजूद India की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित हुई है। Russia ने तेल की निरंतर डिलीवरी का वादा किया है और ऊर्जा मार्गों पर दबाव के स्रोत के तौर पर अमेरिका की कार्रवाइयों का भी जिक्र किया है।
BRICS: एक बहुध्रुवीय (Multipolar) फाइनेंस का मंच
India-Russia के बीच बढ़ते आर्थिक रिश्ते BRICS के बढ़ते प्रभाव के साथ मेल खाते हैं। यह समूह पश्चिमी वित्तीय और राजनीतिक निकायों के विकल्प के तौर पर खुद को पेश कर रहा है, जो एक बहुध्रुवीय दुनिया और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अधिक आवाज देने को बढ़ावा देता है। BRICS के प्रोजेक्ट्स, जैसे न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank) और स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) में व्यापार के प्रयास, अमेरिकी डॉलर और पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर निर्भरता को कम करने का लक्ष्य रखते हैं। यह साझा दृष्टिकोण वैश्विक बदलावों के बीच अधिक वित्तीय स्वतंत्रता और संयुक्त आर्थिक विकास का समर्थन करता है। 2022 में BRICS देशों के बीच व्यापार $614.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, और नए सदस्यों के जुड़ने से सहयोग और बढ़ने की उम्मीद है।
जोखिमों का सामना: प्रतिबंध, कूटनीति और व्यापार की अस्थिरता
व्यापार के इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के सामने कई बड़े जोखिम भी हैं। तेल आयात के कारण India का विशाल व्यापार घाटा, पश्चिमी सहयोगियों, खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) के साथ द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) या दबाव का कारण बन सकता है। India लंबे समय से रूसी रक्षा उपकरणों (Russian Defense Equipment) पर निर्भर रहा है (लगभग 45% सैन्य सामग्री), लेकिन वह पश्चिमी आपूर्तिकर्ताओं (Western Suppliers) से पूरी तरह नाता नहीं तोड़ सकता, जिससे एक नाजुक संतुलन बनाना पड़ता है। Russia द्वारा प्रतिबंधों से बचने के तरीके, जैसे मध्यस्थों (Intermediaries) और 'पैरेलल इम्पोर्ट्स' (Parallel Imports) का उपयोग, उसकी अनुकूलन क्षमता को दर्शाते हैं लेकिन वैश्विक प्रतिबंधों को लागू करने में चुनौतियां भी उजागर करते हैं। हालांकि India अमेरिका और अन्य जगहों से अधिक खरीद कर अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता ला रहा है, सस्ते रूसी तेल पर अत्यधिक निर्भरता और संभावित आपूर्ति व्यवधान (Supply Disruptions) मध्यम अवधि के जोखिम बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्थिति लगातार बदल रही है; अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के कारण India के रूसी तेल आयात में कुछ समय के लिए कमी आई है, जबकि अमेरिका से आयात बढ़ा है।
भविष्य की राह: विविधीकरण (Diversification) और आसान व्यापार मार्ग
दोनों देश व्यापार असंतुलन को ठीक करने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। वे व्यापार बाधाओं को दूर करने, लॉजिस्टिक्स (Logistics) में सुधार करने और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (International North-South Transport Corridor) जैसी परियोजनाओं के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। आगामी इंडिया-यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-Eurasian Economic Union Free Trade Agreement) से भी व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। India की समग्र रणनीति आत्मनिर्भरता (Self-sufficiency) और रणनीतिक विविधीकरण (Strategic Diversification) पर जोर देती है, जिसमें ऊर्जा से परे मजबूत संबंध बनाने के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) का उपयोग किया जाता है। इसमें नए बाजारों की तलाश करना और भविष्य के वैश्विक झटकों के खिलाफ आर्थिक स्थिरता को मजबूत करना शामिल है, जिसका लक्ष्य 2030 तक एक अधिक संतुलित और टिकाऊ व्यापार संबंध स्थापित करना है।
