नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच भारत ने राहत कार्यों में तेजी लाते हुए एक C-130J विमान के जरिए **10 टन** मेडिकल सप्लाई भेजी है। इस प्राकृतिक आपदा में **95** से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि भारी तबाही के कारण **19** पुल और **40 किलोमीटर** सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
राहत अभियान की शुरुआत
बुधवार को भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) ने एक त्वरित मानवीय मिशन के तहत C-130J ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए नेपाल के लिए राहत सामग्री रवाना की। इस खेप में आवश्यक दवाएं और आपातकालीन उपकरण शामिल हैं, जिसका उद्देश्य नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बाढ़ के बाद उपजी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को नियंत्रित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेपाली समकक्ष बलेंद्र शाह के बीच हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद यह कदम उठाया गया है।
मानवीय और आर्थिक नुकसान
आपदा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मरने वालों की संख्या 95 के पार पहुंच गई है। सर्च और रेस्क्यू टीमें अभी भी सैकड़ों लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं, जिनमें 105 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई भी शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर भी चिंता जताई गई है, जिसके चलते World Bank ने रिकवरी कार्यों के लिए ₹25 बिलियन की आपातकालीन वित्तीय सहायता देने की पेशकश की है। चीन ने भी सरकार को नकद सहायता प्रदान की है।
इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान
बाढ़ ने बुनियादी ढांचे की कमर तोड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 19 बड़े पुल पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं और लगभग 40 किलोमीटर लंबी सड़कें बह गई हैं, जिससे आवाजाही ठप हो गई है। इसका सीधा असर वहां की लॉजिस्टिक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।
हाइड्रोपावर और भविष्य की चुनौतियां
इस आपदा का असर कई महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ा है, जिससे उनके ऑपरेशन पूरी तरह बाधित हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर बिजली और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए दीर्घकालिक नुकसान का आकलन किया जा रहा है। आने वाले महीनों में क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि बुनियादी ढांचे को बहाल करने की गति क्या रहती है।
