भारत और पेरू के बीच एक बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसे **2027** तक फाइनल करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत अब पेरू के लिए दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बन गया है, जिसका मुख्य कारण गोल्ड ट्रेड में आया **152%** का भारी इजाफा है।
भारत और पेरू अब एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों का लक्ष्य इस ट्रीटी को 2027 तक अंतिम रूप देना है। हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी से जुलाई 2026 के बीच पेरू का भारत को एक्सपोर्ट $6.184 बिलियन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 152% ज्यादा है।
इस उछाल के पीछे की वजह
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ सोने (Gold) की बढ़ती डिमांड का है। पेरू अपने व्यापार के लिए नए मार्केट तलाश रहा है क्योंकि अमेरिका ने जुलाई 2026 में पेरू के कृषि उत्पादों जैसे ब्लूबेरी, अंगूर और एवोकैडो पर 12.5% का टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका से बढ़ते ट्रेड फ्रिक्शन के कारण पेरू का भारत पर भरोसा तेजी से बढ़ा है।
बातचीत का वर्तमान स्टेटस
हालांकि समझौते का लक्ष्य 2027 है, लेकिन कूटनीतिक और आर्थिक चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। यह बातचीत 2017 में शुरू हुई थी और अब ट्रेड मिनिस्टर रोजर्स वालेंसिया ने पुष्टि की है कि एक काउंटर-प्रपोजल भारतीय अधिकारियों के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है। यह स्टेज मार्केट एक्सेस और रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स के मतभेदों को सुलझाने के लिए काफी अहम है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो मेटल रिफाइनिंग, ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग और बुलियन ट्रेडिंग में काम करती हैं। एक औपचारिक ट्रेड पैक्ट भविष्य में फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स और इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए भी लॉजिस्टिक्स को आसान बना सकता है। हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि ट्रेड एग्रीमेंट अक्सर घरेलू विरोध या पॉलिसी बदलावों के कारण देरी का सामना कर सकते हैं। इसके अलावा, पेरू की अर्थव्यवस्था गोल्ड और कॉपर पर बहुत ज्यादा निर्भर है, इसलिए ग्लोबल कमोडिटी कीमतों में आने वाली गिरावट का सीधा असर भारत-पेरू के व्यापारिक संतुलन पर पड़ सकता है।
