ओमान CEPA की खास बातें
भारत का ओमान के साथ कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) 1 जून से प्रभावी हो रहा है। 18 दिसंबर 2025 को हस्ताक्षरित यह पैक्ट, भारतीय उत्पादों के लिए ओमान में बड़ी मात्रा में ड्यूटी-फ्री एक्सेस (Duty-Free Access) प्रदान करके द्विपक्षीय ट्रेड (Bilateral Trade) को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है। ओमान भारतीय उत्पादों के लिए अपने 98.08% टैरिफ लाइन्स (Tariff Lines) पर ड्यूटी खत्म कर देगा, जो कि एक्सपोर्ट वैल्यू (Export Value) के 99.38% हिस्से को कवर करता है। वहीं, भारत ओमान से होने वाले आयात (Import) के लिए अपनी लगभग 78% टैरिफ लाइन्स पर ड्यूटी कम करेगा, जो इम्पोर्ट वैल्यू (Import Value) के 95% को कवर करेगा। कुछ संवेदनशील वस्तुओं के लिए टैरिफ-रेट कोटा (Tariff-Rate Quotas) का इस्तेमाल किया जाएगा। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय ट्रेड 2024-25 में पहले ही 18.6% बढ़कर $10.61 बिलियन तक पहुंच गया था। इससे पहले मई 2022 से सक्रिय भारत-यूएई CEPA ने रत्नों और आभूषणों और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों में ट्रेड को काफी बढ़ावा दिया था।
भारत का $2 ट्रिलियन एक्सपोर्ट लक्ष्य
ओमान CEPA, भारत की महत्वाकांक्षी रणनीति का हिस्सा है जिसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में कुल एक्सपोर्ट को $2 ट्रिलियन तक पहुंचाना है, जिसमें FY27 तक $1 ट्रिलियन का लक्ष्य शामिल है। यह FY26 में $863 बिलियन के कुल एक्सपोर्ट (सर्विसेज सहित) पर आधारित है। भारत पहले ही यूएई, ऑस्ट्रेलिया और ईएफटीए ब्लॉक (EFTA bloc) के साथ ट्रेड एग्रीमेंट कर चुका है, और इस साल ईयू (EU) और यूके (UK) के साथ भी ऐसे समझौते की योजना है। इन एक्सपोर्ट लक्ष्यों को हासिल करना क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों जैसे चीन की तुलना में चुनौतीपूर्ण है। FY26 में भारत की एक्सपोर्ट ग्रोथ 10-15% रही, जो चीन के विस्तार के दौर से कम है। वियतनाम मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) और इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics) जैसे क्षेत्रों में कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश कर रहा है। भारत को पहले भी एक्सपोर्ट लक्ष्य हासिल करने में कठिनाई हुई है, अक्सर उच्च इम्पोर्ट मांग के कारण 5-7% जीडीपी (GDP) के आसपास ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) देखा गया है।
ग्लोबल इकोनॉमिक और जियोपॉलिटिकल चुनौतियां
जबकि मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भारत को एक "इकोनॉमिक ब्राइट स्पॉट" (Economic Bright Spot) बताया है, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करती है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में संघर्षों से उत्पन्न जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) सप्लाई चेन्स (Supply Chains) को बाधित कर रही हैं और कमोडिटी प्राइसेज (Commodity Prices) को बढ़ा रही हैं। रेड सी शिपिंग रूट (Red Sea Shipping Route) में व्यवधानों से ट्रांजिट टाइम (Transit Times) 7-14 दिन बढ़ गया है और भारत के यूरोपीय ट्रेड के लिए प्रति कंटेनर $500-$1000 का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ग्लोबल इन्फ्लेशन (Global Inflation) और बढ़ते इंटरेस्ट रेट्स (Interest Rates) से मैन्युफैक्चर्ड गुड्स (Manufactured Goods) की मांग कम होने की उम्मीद है। 2026-2027 के लिए ग्लोबल ग्रोथ फोरकास्ट (Global Growth Forecasts) लगभग 2-3% है। भारत की एक्सपोर्ट रणनीति को कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस (Cost Competitiveness) और वैल्यू (Value) पर ध्यान केंद्रित करके एक सॉफ्ट ग्लोबल मार्केट (Soft Global Market) के अनुकूल ढालना होगा।
एग्जीक्यूशन रिस्क और कॉम्पिटिशन
ओमान CEPA और एक्सपोर्ट ड्राइव के स्पष्ट उद्देश्यों के बावजूद, एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risks) और कॉम्पिटिशन (Competition) पर ध्यान देने की आवश्यकता है। विश्लेषकों (Analysts) का भारत के $2 ट्रिलियन एक्सपोर्ट लक्ष्य को लेकर आशावादी रुख है, लेकिन वे अनिश्चित ग्लोबल डिमांड (Global Demand) पर निर्भरता और प्रभावी इम्प्लीमेंटेशन (Effective Implementation) की आवश्यकता जैसी चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं। भारतीय एक्सपोर्टर्स, विशेष रूप से टेक्सटाइल्स (Textiles) और अपैरल (Apparel) सेक्टर में, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से लोअर कॉस्ट्स (Lower Costs) के कारण कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं। यह भारत की स्थिति को मास-मार्केट सेगमेंट्स (Mass-market Segments) में चुनौती देता है, भले ही उसके पास क्वालिटी एडवांटेजेस (Quality Advantages) हों। पिछले ट्रेड लिबरलाइजेशन (Trade Liberalization) ने कभी-कभी ट्रेड डेफिसिट को बढ़ाया है, जैसा कि FY25 में देखा गया। इम्पोर्ट ड्यूटीज़ (Import Duties) और डोमेस्टिक प्रोडक्शन इंसेटिव्स (Domestic Production Incentives) का प्रबंधन एक्सपोर्ट ग्रोथ को स्थायी आर्थिक लाभ में बदलने के लिए महत्वपूर्ण होगा। सफलता इन्फ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure), लॉजिस्टिक्स (Logistics) और ग्लोबल मार्केट डिमांड्स (Global Market Demands) के अनुकूल भारतीय फर्मों की क्षमता पर भी निर्भर करती है।
एक्सपोर्ट लक्ष्यों पर आउटलुक
विश्लेषक भारत के विविध ट्रेड एग्रीमेंट्स को इकोनॉमिक रेसिलिएंस (Economic Resilience) और मार्केट एक्सपेंशन (Market Expansion) के लिए सकारात्मक मानते हैं। हालांकि, 2031 तक $2 ट्रिलियन के एक्सपोर्ट लक्ष्य तक पहुंचना बहस का विषय है। वर्तमान रुझानों के साथ, FY27 तक $1.5-$1.7 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। $2 ट्रिलियन से अधिक की उपलब्धि के लिए तेज ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ (Global Trade Growth) या भारत की ओर अधिक मैन्युफैक्चरिंग शिफ़्ट्स (Manufacturing Shifts) की आवश्यकता होगी। ओमान CEPA जैसे एफटीए (FTAs) के इम्प्लीमेंटेशन से एक्सपोर्ट सेक्टर को समर्थन मिलना चाहिए। एक ग्लोबल ट्रेड प्लेयर (Global Trade Player) के रूप में भारत की सफलता कॉम्पिटिशन, इकोनॉमिक स्टेबिलिटी (Economic Stability) और कॉम्प्लेक्स जियोपॉलिटिकल सिचुएशन (Complex Geopolitical Situation) के प्रबंधन पर निर्भर करेगी।