व्यापार और टैलेंट का नया अध्याय
भारत और न्यूज़ीलैंड ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप दे दिया है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अगले 5 सालों में दोगुना होकर $5 बिलियन के पार पहुंचने का अनुमान है। न्यूज़ीलैंड को भारत में अपने 95% एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ में बड़ी राहत मिलेगी, जो उसके व्यापार को बढ़ावा देगा।
टैरिफ में कटौती और भारतीय निर्यात को बूस्ट
इस डील के तहत, न्यूज़ीलैंड के 100% एक्सपोर्ट (निर्यात) को भारत में टैरिफ-फ्री एक्सेस मिलेगा, जिसमें 95% सामान पर टैरिफ या तो खत्म कर दिए जाएंगे या काफी कम कर दिए जाएंगे। शुरुआत में 57% सामान पर तुरंत ड्यूटी खत्म होगी, जो कि पूरी तरह लागू होने पर 82% तक पहुंच जाएगी। इसमें मेमने (lamb), ऊन (wool), कोयला (coal), चमड़ा (leather) और औद्योगिक उत्पादों जैसे अहम सेक्टर्स को फायदा होगा। वाइन (wine) और सी-फूड (seafood) पर भी टैरिफ कटौती की जाएगी। इसके जवाब में, भारत को न्यूज़ीलैंड में अपने सभी एक्सपोर्ट्स के लिए 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। यह भारत के टेक्सटाइल, अपैरल और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए बड़ा बूस्ट होगा।
भारतीय पेशेवरों को मिलेगा न्यूज़ीलैंड में मौका, निवेश बढ़ेगा
सिर्फ माल (goods) का व्यापार ही नहीं, यह समझौता सर्विसेज (services) के क्षेत्र में भी मील का पत्थर साबित होगा। न्यूज़ीलैंड भारतीय पेशेवरों के लिए एक खास वीज़ा (visa) सुविधा शुरू करेगा, जिसके तहत हर साल 5,000 स्किल्ड प्रोफेशनल्स 3 साल तक के लिए वहां काम कर सकेंगे। यह IT, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे सेक्टर्स के लिए है। इसके अलावा, न्यूज़ीलैंड अगले 15 सालों में भारत में $20 बिलियन का निवेश करने के लिए भी प्रतिबद्ध है, जो आर्थिक साझेदारी को और गहरा करेगा।
भारत ने कृषि क्षेत्र को रखा सुरक्षित
हालांकि, भारत ने अपने किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। इसलिए, डेरी (dairy), प्याज (onions), चीनी (sugar), मसाले (spices), खाने के तेल (edible oils) और रबर (rubber) जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को टैरिफ कंसेशन (tariff concessions) से बाहर रखा गया है। यह भारत की ऐसी रणनीति रही है, जो लगभग 8 करोड़ छोटे डेरी किसानों की आजीविका की रक्षा करती है।
डील पर चिंताएं और आगे का रास्ता
यह समझौता भारत के लिए 2025 में तीसरा FTA है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की सक्रिय व्यापार कूटनीति को दर्शाता है। हालांकि, न्यूज़ीलैंड के कुछ उद्योगपतियों और विपक्षी दलों ने इस डील पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारत ने अपने मुख्य कृषि उत्पादों को बचाकर रखा है, जबकि न्यूज़ीलैंड के 95% एक्सपोर्ट्स को राहत दी है, इसलिए यह पूरी तरह 'फ्री' या 'फेयर' डील नहीं है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार $2.4 बिलियन के आसपास है, जिसे $5 बिलियन तक ले जाना एक बड़ा लक्ष्य है। विश्लेषकों का मानना है कि यह FTA दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोलेगा और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा।
