भारत और मॉरीशस के अधिकारी अपने व्यापार समझौते को विस्तार देने के लिए 7 अक्टूबर को बैठक करने जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को हटाना, तकनीकी मानकों को सरल बनाना और पेमेंट प्रोसेस को आसान करना है।
भारत और मॉरीशस के प्रतिनिधि 7 अक्टूबर को 'हाई पावर्ड जॉइंट ट्रेड कमिटी' के दूसरे सत्र के लिए जुटेंगे। इस बैठक का मुख्य लक्ष्य अप्रैल 2021 से लागू 'कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CECPA) का दायरा बढ़ाना है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापारिक घर्षण को कम करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
बाधाओं को हटाने पर जोर
फिलहाल यह समझौता भारत के 310 और मॉरीशस के 615 प्रोडक्ट लाइन्स को कवर करता है, लेकिन अब इसे नए सेक्टरों तक फैलाने की तैयारी है। बैठक में 'नॉन-टैरिफ बैरियर्स' यानी तकनीकी और नौकरशाही की पेचीदगियों को दूर करने पर विशेष चर्चा होगी। 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स' अपने मॉरीशस के समकक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स और प्रोसेस्ड फूड्स जैसे सेक्टरों में सामान भेजने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके।
करेंसी और ट्रेड डेटा
कमिटी लोकल करेंसी सेटलमेंट मैकेनिज्म की प्रगति की भी समीक्षा करेगी, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी और एक्सचेंज रेट के रिस्क को मैनेज किया जा सकेगा। अगर एक्सपोर्ट आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत का मॉरीशस को एक्सपोर्ट 2021 के $442 मिलियन से बढ़कर 2026 फाइनेंशियल ईयर तक $473.64 मिलियन हो गया है। साथ ही, भारतीय एक्सपोर्टर्स द्वारा उपयोग किए जाने वाले टैरिफ लाइन्स की संख्या 3,593 से बढ़कर 4,345 तक पहुंच गई है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि ये ट्रेड एग्रीमेंट्स रातों-रात शेयर बाजार में हलचल नहीं मचाते, बल्कि ये एक स्ट्रक्चरल बदलाव की शुरुआत होते हैं। अगर इस बैठक के बाद स्टैंडर्ड्स का तालमेल सफल रहता है, तो एग्रीकल्चर, केमिकल्स और कंज्यूमर गुड्स से जुड़ी कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट के नए रास्ते खुलेंगे। बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि किन नए प्रोडक्ट कैटेगरीज को इस लिस्ट में जगह मिलती है और नॉन-टैरिफ बाधाओं का समाधान कितनी जल्दी निकलता है।
