Maritime Trade: कमर्शियल जहाजों पर हमलों के खिलाफ भारत और लाइबेरिया का सख्त रुख

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Maritime Trade: कमर्शियल जहाजों पर हमलों के खिलाफ भारत और लाइबेरिया का सख्त रुख

भारत और लाइबेरिया ने गल्फ और ब्लैक सी में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है। ये हमले ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं और इसमें भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी दांव पर लगी है।

नाविकों की सुरक्षा और व्यापार पर खतरा

'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग' के को-चेयर के रूप में भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त राष्ट्र में इन हमलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। हाल के दिनों में कई जहाजों, जैसे कि Alfa Watan, Able और Aframax Rio को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में भारतीय क्रू मेंबर्स के घायल होने की खबरें भी आई हैं, जिससे विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

इकोनॉमी के लिए जोखिम

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि भारत का लगभग 95% ट्रेड समुद्री रास्ते से होता है। इन हमलों के कारण शिपिंग कंपनियों पर 'वॉर रिस्क इंश्योरेंस' का बोझ बढ़ गया है, जिससे माल ढुलाई यानी फ्रेट कॉस्ट (Freight Cost) में उछाल आ सकता है। सप्लाई चेन में देरी और कमोडिटी की कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय एक्सपोर्टर्स और इंपोर्टर्स पर पड़ेगा।

कूटनीतिक पहल और भविष्य की राह

सरकार अब पनामा और लाइबेरिया जैसे देशों के साथ समुद्री समझौतों पर जोर दे रही है ताकि विदेशी झंडे वाले जहाजों पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि ये बड़े बदलाव लंबी अवधि के हैं, लेकिन फिलहाल भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव बना रहा है ताकि ग्लोबल ट्रेड रूट्स को सुरक्षित रखा जा सके। आने वाले समय में शिपिंग फ्रेट इंडेक्स और इंश्योरेंस दरों पर निवेशकों की नजर रहना बेहद जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.