भारत-कोरिया ट्रेड डील में बड़ा बदलाव: अब वॉल्यूम नहीं, वैल्यू पर फोकस

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारत-कोरिया ट्रेड डील में बड़ा बदलाव: अब वॉल्यूम नहीं, वैल्यू पर फोकस
Overview

भारत और दक्षिण कोरिया अपने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को मजबूत करने के एक अहम पड़ाव पर पहुँच गए हैं। अब फोकस सिर्फ ट्रेड के वॉल्यूम पर नहीं, बल्कि डेढ़ खरब डॉलर से अधिक के व्यापार घाटे को कम करने पर है, जिसके लिए खास इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन और लोकलाइजेशन पर जोर दिया जा रहा है। ओडिशा में शुरू होने वाला एक बड़ा **6 MTPA** का स्टील प्रोजेक्ट इसका मुख्य उदाहरण है।

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इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की नई रणनीति

कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के अपडेटेड राउंड की बातचीत अब सिर्फ टैरिफ (Tariff) पर अटकी नहीं है। नई दिल्ली में हुई बातचीत के 12वें दौर में भारतीय पॉलिसीमेकर्स (Policymakers) ने स्ट्रक्चरल ट्रेड इम्बैलेंस (Structural Trade Imbalance) को ठीक करने की रणनीति अपनाई है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह घाटा बढ़कर $15 बिलियन से ज्यादा हो गया था। डिजिटल ट्रेड, सप्लाई चेन रेजिलिएंस (Supply Chain Resilience) और इंडस्ट्रियल पार्टनरशिप (Industrial Partnership) पर फोकस करके, दोनों देश ट्रांजैक्शनल इंपोर्ट-एक्सपोर्ट (Import-Export) मॉडल से हटकर इन्वेस्टमेंट-लेड फ्रेमवर्क (Investment-led Framework) की ओर बढ़ रहे हैं।

स्टील प्रोजेक्ट बना नया मॉडल

JSW Steel और POSCO के बीच 50:50 की ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) में ओडिशा में 6 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) का इंटीग्रेटेड प्लांट लगाने का फैसला इस नई सोच का सबसे बड़ा उदाहरण है। इस प्रोजेक्ट में करीब ₹35,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट होगा। यह कदम 'आत्मनिर्भरता' को बढ़ावा देगा। कोरियाई टेक्नोलॉजी को भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम (Manufacturing Ecosystem) में शामिल करके, यह कोलैबोरेशन (Collaboration) ऑटोमोटिव और वैल्यू-एडेड सेक्टर्स के लिए जरूरी हाई-ग्रेड फ्लैट स्टील का उत्पादन करेगा। यह पहले के उन समझौतों से अलग है, जहाँ कोरिया से तैयार इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल कंपोनेंट्स (Industrial Components) का इंपोर्ट ज्यादा होता था और भारत में लोकल कैपेसिटी (Local Capacity) नहीं बन पा रही थी।

रेगुलेटरी चुनौतियाँ और अड़चनें

इस नई साझेदारी के रास्ते में रेगुलेटरी (Regulatory) और एडमिनिस्ट्रेटिव (Administrative) दिक्कतें अभी भी हैं। भारतीय एक्सपोर्टर्स (Exporters) को आज भी कई नॉन-टैरिफ बैरियर्स (Non-Tariff Barriers) का सामना करना पड़ता है, जैसे कि स्ट्रिक्ट सर्टिफिकेशन (Strict Certification) और सैनिटरी एंड फाइटोसैनिटरी स्टैंडर्ड्स (Sanitary and Phytosanitary Standards)। इसीलिए, इस बार की बातचीत सिर्फ टैरिफ कम करने पर नहीं, बल्कि इन एडमिनिस्ट्रेटिव रुकावटों को दूर करने पर केंद्रित है। 2010 के पुराने एग्रीमेंट की आलोचना इसलिए भी होती थी कि इसमें 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' (Rules of Origin) पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया, जिससे तीसरे देशों का सामान इस डील का फायदा उठाकर भारतीय बाजार में आसानी से आ जाता था। भारत अब इसे और मजबूत वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल (Verification Protocols) से ठीक करना चाहता है।

जोखिम: ओवरकैपेसिटी और धीमी एग्जीक्यूशन

निवेशकों को इन इंडस्ट्रियल इनिशिएटिव्स (Industrial Initiatives) की टाइमलाइन (Timeline) और एग्जीक्यूशन (Execution) को लेकर सतर्क रहना चाहिए। JSW-POSCO का प्रोजेक्ट भले ही अच्छी शुरुआत का संकेत दे रहा है, लेकिन इसके पूरा होने में काफी समय लगेगा और उम्मीद है कि यह 2031 तक ही चालू हो पाएगा। वहीं, 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को $50 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य काफी एग्रेसिव (Aggressive) है, जिसमें ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) की अस्थिरता और स्टील इंडस्ट्री की साइक्लिकल नेचर (Cyclical Nature) बाधा डाल सकती है। अगर ग्लोबल स्टील की मांग कम हुई, तो बड़े प्रोजेक्ट्स के सहारे ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को पूरा करने की कोशिश में कैपिटल एलोकेशन रिस्क (Capital Allocation Risk) बढ़ सकता है। साथ ही, ओडिशा में पहले भी ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स के फेल होने का इतिहास रहा है, जो यह याद दिलाता है कि जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) और रेगुलेटरी अड़चनें अभी भी बड़े द्विपक्षीय समझौतों के लिए एक बड़ा खतरा हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.