भारत और जापान ने व्यापार को बढ़ावा देने और **15.4 अरब डॉलर** के व्यापार घाटे को दूर करने के लिए भारत-जापान CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) की समीक्षा शुरू की है। दोनों देशों ने अगले दशक में **10 ट्रिलियन येन** (लगभग **62 अरब डॉलर**) के निवेश का लक्ष्य रखा है।
व्यापार और निवेश में तेजी की ओर भारत-जापान
नई दिल्ली और टोक्यो के बीच आर्थिक साझेदारी मजबूत हो रही है। भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्री अकाज़ावा रयोसेई ने टोक्यो में 25 अगस्त, 2026 को मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत-जापान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की समीक्षा को तेज करना था, ताकि इसे मौजूदा वैश्विक आर्थिक जरूरतों के हिसाब से अपडेट किया जा सके।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत जापान के साथ अपने बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने की कोशिश कर रहा है। 2025-26 के वित्तीय वर्ष में यह घाटा 15.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
₹62 अरब डॉलर के निवेश का बड़ा लक्ष्य
व्यापार के अलावा, दोनों देशों ने एक बड़े वित्तीय लक्ष्य पर भी ध्यान केंद्रित किया है। भारत और जापान अगले एक दशक में कुल 10 ट्रिलियन येन, यानी लगभग 62 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इस साझेदारी का मकसद भारत को जापानी कंपनियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाना है, जिससे भारत 'चाइना-प्लस-वन' रणनीति के तहत विनिर्माण (manufacturing) और प्रौद्योगिकी निवेश के लिए एक स्थिर विकल्प के रूप में उभर सके।
सेमीकंडक्टर से लेकर AI तक, सहयोग का दायरा
इस बैठक में दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रमुख नेता भी शामिल हुए। टोयोटा इलेक्ट्रॉनिक्स, फुजीफिल्म होल्डिंग्स और एनईसी कॉर्पोरेशन जैसी प्रमुख जापानी कंपनियों ने सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर केंद्रित गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया। जेएफई स्टील, निप्पॉन स्टील और आईएचआई कॉर्पोरेशन जैसी फर्मों के साथ हुई चर्चाओं में स्टील, एयरोस्पेस और उन्नत औद्योगिक इंजीनियरिंग में सहयोग पर भी जोर दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य केवल व्यापार की मात्रा बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक को भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में लाना है।
निवेशकों के लिए ध्यान रखने योग्य बातें
हालांकि निवेश की संभावनाएं काफी अधिक हैं, निवेशकों को कुछ चुनौतियों पर भी गौर करना चाहिए। व्यापार घाटा एक लगातार दबाव का बिंदु बना हुआ है, और व्यापार को संतुलित करने के पिछले प्रयासों में भी बाधाएं आई हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से दवा क्षेत्र की कंपनियों को, जापान में जटिल नियामक और प्रमाणन बाधाओं का सामना करना पड़ा है, जो बाजार पहुंच को सीमित कर सकती हैं। इन उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में सफलता भारत की स्थानीय बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और परियोजना में देरी को कम करने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी। निवेशक CEPA समीक्षा की विशिष्ट समय-सीमा पर नज़र रख सकते हैं और यह देख सकते हैं कि क्या ये उच्च-स्तरीय वार्ताएं ठोस, प्रतिबद्ध परियोजना घोषणाओं में तब्दील होती हैं, साथ ही इन सीमा-पार सहयोगों में शामिल कंपनियों की प्रगति पर भी नजर रख सकते हैं।
