दिल्ली में चल रहे ये टेक्निकल सेशन भारत और इजरायल के बीच आर्थिक साझेदारी में एक नया मोड़ ला रहे हैं। यह बातचीत सिर्फ गुड्स ट्रेड (goods trade) के दायरे से आगे बढ़कर एक ज्यादा कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेशन (comprehensive integration) की ओर बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अहम यात्रा इस सहयोग को तेज करने की रणनीतिक जरूरत को दर्शाती है, जिसका मकसद भविष्य की ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस (global competitiveness) के लिए vital क्षेत्रों में ज्वाइंट इनोवेशन (joint innovation) और डेवलपमेंट की ओर बढ़ना है। इस इनिशिएटिव का लक्ष्य दोनों देशों की अलग-अलग क्षमताओं का लाभ उठाना और ट्रेड डायनामिक्स (trade dynamics) को ट्रांजैक्शनल एक्सचेंज (transactional exchanges) से सिनर्जिस्टिक अलायंस (synergistic alliances) में बदलना है।
FTA नेगोशिएशंस और PM-लेवल एंगेजमेंट (FTA Negotiations and PM-Level Engagement)
भारत और इजरायल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए औपचारिक बातचीत का शुरू होना, जो 23 फरवरी से 26 फरवरी 2026 तक चलेगी, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की नई ऊर्जा का संकेत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक यात्रा इन चर्चाओं को गुड्स और सर्विसेज (goods and services) के मार्केट एक्सेस (market access) से आगे बढ़ाने के लिए है, जिसमें इनोवेशन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग (high-tech manufacturing) में गहरे सहयोग को शामिल किया गया है। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने इन सेक्टर्स को आपसी लाभ के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है। प्रस्तावित FTA का मकसद MSMEs सहित व्यवसायों के लिए ज्यादा सर्टेनिटी (certainty) और प्रेडिक्टिबिलिटी (predictability) प्रदान करना है, और यह द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार के लिए एक कैटलिस्ट (catalyst) का काम करेगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि 2026 तक एक कॉम्प्रिहेंसिव डील (comprehensive deal) फाइनल हो सकती है।
मर्चेंडाइज ट्रेड (Merchandise Trade) से परे एक विश्लेषण
फाइनेंशियल ईयर 2025 में भारत और इजरायल के बीच मर्चेंडाइज ट्रेड $3.62 बिलियन रहा, लेकिन FY24-25 में भारत के एक्सपोर्ट (exports) में 52% और इम्पोर्ट (imports) में 26.2% की हालिया गिरावट, पारंपरिक कमोडिटीज (commodities) से आगे बढ़कर डाइवर्सिफिकेशन (diversification) की जरूरत को दर्शाती है। ऐतिहासिक रूप से, 1992 में औपचारिक हुए इस पार्टनरशिप ने 1993 के एग्रीमेंट के बाद से साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Science and Technology) सहयोग में लगातार ग्रोथ देखी है, जिसमें 75 ज्वाइंट स्टडीज (joint studies) आयोजित की गई हैं। यह FTA इस विरासत पर आगे बढ़ने का लक्ष्य रखता है, जहां एनालिस्ट्स (analysts) बल्क गुड्स ट्रेड (bulk goods trade) में तेज वृद्धि के बजाय डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग (defense manufacturing), सेमीकंडक्टर डिजाइन (semiconductor design), AI और प्रिसिजन एग्रीकल्चर (precision agriculture) जैसे क्षेत्रों में स्ट्रैटेजिक अवसरों पर जोर दे रहे हैं। इजरायल, जिसके अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ FTA हैं, इस एग्रीमेंट को अपनी टेक्नोलॉजिकल सिनर्जी (technological synergy) को गहरा करने का एक तरीका मानता है। I2U2 ग्रुप भी इस सहयोग को मजबूत करता है, जो रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) जैसे क्षेत्रों में ज्वाइंट प्रोजेक्ट्स (joint projects) को बढ़ावा देता है। वर्तमान नेगोशिएशंस गुड्स ट्रेड, सर्विसेज लिबरलाइजेशन (services liberalization), रूल्स ऑफ ओरिजिन (rules of origin) और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (intellectual property rights) जैसे पहलुओं को संबोधित करने के लिए स्ट्रक्चर्ड (structured) हैं, जो भारत के अन्य ट्रेड पैक्ट्स (trade pacts) के पहलुओं को दर्शाते हैं, जिनमें गुड्स ट्रेड के लिए मिले-जुले परिणाम मिले हैं लेकिन आईटी (IT) जैसे सर्विसेज सेक्टर्स (services sectors) को लाभ हुआ है।
संभावित बाधाएं (The Bear Case)
भारत-इजरायल FTA के जरिए व्यापार बढ़ाने के रास्ते में कुछ स्ट्रक्चरल इम्पेडीमेंट्स (structural impediments) भी हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का सुझाव है कि गुड्स ट्रेड में विस्तार का पैमाना सीमित हो सकता है, क्योंकि इजरायल का निश (niche), हाई-इंकम मार्केट (high-income market) पहले से ही यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका जैसे मौजूदा पार्टनर्स (partners) के साथ अच्छी तरह से एकीकृत है, जिन्हें प्रेफरेंशियल टैरिफ एग्रीमेंट्स (preferential tariff agreements) का लाभ मिलता है। जिन सेक्टर्स में भारत की कॉम्पिटिटिव एडवांटेज (competitive advantage) है, जैसे कि एग्रीकल्चर (agriculture), जेनेरिक्स (generics), स्टील (steel) और केमिकल्स (chemicals), वे महत्वपूर्ण रेगुलेटरी हर्डल्स (regulatory hurdles) का सामना करते हैं या पहले से ही अन्य देशों के लिए टैरिफ प्रेफरेंसेज (tariff preferences) का लाभ उठा रहे हैं। यह डायनामिक (dynamic) भारत के FTAs में देखे गए व्यापक पैटर्न को दर्शाता है, जिसके परिणामस्वरूप कभी-कभी इम्पोर्ट में असंगत वृद्धि हुई है, जिससे ट्रेड डेफिसिट (trade deficit) बढ़ा है। इसके अलावा, रीजनल जियोपॉलिटिकल टेंशन्स (regional geopolitical tensions) और ट्रेड रूट डिसरप्शन्स (trade route disruptions) ने हाल के द्विपक्षीय व्यापार वॉल्यूम्स (bilateral trade volumes) को प्रभावित किया है, जिसके कारण FY24-25 में गिरावट आई है। भारत से मास-मार्केट एक्सपोर्ट्स (mass-market exports) के लिए सीमित दायरे के साथ-साथ इजरायल के सख्त क्वालिटी और फाइटो-सेनेटरी नॉर्म्स (quality and phytosanitary norms) कई भारतीय उत्पादों के लिए एक स्ट्रक्चरल डिसएडवांटेज (structural disadvantage) पेश करते हैं।
भविष्य का आउटलुक (The Future Outlook)
गुड्स ट्रेड में संभावित चुनौतियों के बावजूद, ओवरआर्चिंग सेंटिमेंट (overarching sentiment) हाई-वैल्यू, स्ट्रैटेजिक सेक्टर्स (high-value, strategic sectors) में एक तेज गति की ओर इशारा करता है। अधिकारियों और एनालिस्ट्स (analysts) का अनुमान है कि FTA, हाल ही में साइन किए गए द्विपक्षीय निवेश समझौते (Bilateral Investment Agreement) के साथ मिलकर, आने वाले वर्षों में व्यापार प्रवाह को तीन या चार गुना बढ़ा सकता है, खासकर जॉइंट R&D (joint R&D), AI, साइबर सुरक्षा और डिफेंस टेक्नोलॉजी (defense technology) जैसे क्षेत्रों में। पूरक शक्तियों (complementary strengths) द्वारा संचालित यह स्ट्रैटेजिक अलाइनमेंट (strategic alignment) दोनों देशों को न केवल अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा करने की स्थिति में रखता है, बल्कि महत्वपूर्ण ग्लोबल टेक्नोलॉजी डोमेन (global technology domains) में महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरने की भी स्थिति में रखता है। फोकस लीगल और इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क्स (legal and institutional frameworks) को टेंजिबल कोलैबोरेटिव प्रोजेक्ट्स (tangible collaborative projects) में बदलने पर बना हुआ है।