भारत पर फोकस करने वाले इक्विटी फंड्स (Equity Funds) का ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट्स (Global Emerging Markets) के मुकाबले पिछला 5 साल का आउटपरफॉरमेंस (Outperformance) अब कम हो गया है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि निवेशकों का पैसा AI से जुड़ी कंपनियों वाले दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे मार्केट्स की ओर जा रहा है।
5 साल की बढ़त हुई गायब!
जो भारतीय इक्विटी फंड्स पिछले करीब 5 सालों से अपने इमर्जिंग मार्केट साथियों से लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे, उनकी यह बढ़त अब काफी कम हो गई है। एलारा सिक्योरिटीज (Elara Securities) के डेटा के मुताबिक, ग्लोबल पैसा भारतीय शेयर्स से निकलकर साउथ कोरिया और ताइवान जैसे मार्केट्स की तरफ जा रहा है। इन देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
इस बदलाव के कारण, भारतीय फंड्स ने 2021 की शुरुआत से 2024 के आखिर तक जो बढ़त बनाई थी, वह लगभग खत्म हो गई है। भारत-केंद्रित फंड्स के प्रदर्शन का अनुपात (Ratio) अब अप्रैल 2021 के स्तर पर आ गया है। यह दिखाता है कि कैसे ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स, खासकर AI सेक्टर की तेज ग्रोथ, अलग-अलग देशों में पैसे के फ्लो (Flow) को प्रभावित कर सकती है।
ग्लोबल कैपिटल फ्लो का असर
जहां एक तरफ ग्लोबल निवेशकों की अमेरिका के शेयर्स में दिलचस्पी बनी हुई है, वहीं इमर्जिंग मार्केट्स ने हाल ही में बिकवाली के लंबे दौर के बाद पहली बार साप्ताहिक इनफ्लो (Inflow) देखा है। यह मुख्य रूप से साउथ कोरियाई स्टॉक्स में आई तेजी से प्रेरित था। इस ट्रेंड ने भारतीय मार्केट पर दबाव डाला है। पिछले हफ्ते, भारत से $95 मिलियन का नेट आउटफ्लो (Outflow) हुआ। यह पिछले तीन महीनों में देखे गए $400 मिलियन के औसत साप्ताहिक एग्जिट (Exit) से कम है, लेकिन यह दिखाता है कि फॉरेन इन्वेस्टर्स AI-हैवी मार्केट्स में पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर रहे हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और मार्केट वैल्यूएशन
लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो यह बदलाव काफी अहम है। एलारा सिक्योरिटीज ने बताया कि भारत के मार्केट कैप (Market Capitalization) और साउथ कोरिया के मार्केट कैप का अनुपात, जो USD में मापा गया है, 1996 और 2002 के बाद से सपोर्ट लेवल (Support Levels) पर आ गया है। यह करीब 30 सालों में भारत के सापेक्ष अंडरपरफॉर्मेंस (Underperformance) का सबसे तीव्र दौर है। ऐतिहासिक रूप से, मल्टी-डिकेड सपोर्ट लेवल पर पहुंचने वाले मार्केट रेश्यो (Market Ratios) कभी-कभी परफॉर्मेंस में संभावित टर्निंग पॉइंट्स का संकेत देते हैं।
निवेशकों के लिए, मुख्य बात यह देखनी होगी कि आउटफ्लो की रफ्तार कम होती है या AI-ड्रिवेन मार्केट्स में यह रोटेशन जारी रहता है। हालांकि भारत के हालिया मार्केट स्थिरीकरण से यह पता चलता है कि तीव्र अंडरपरफॉर्मेंस का दौर चरम पर पहुंचने वाला हो सकता है, लेकिन अंतिम दिशा ग्लोबल लिक्विडिटी (Liquidity), प्रतिस्पर्धी बाजारों में AI रैली की स्थिरता और आने वाली तिमाहियों में क्षेत्रीय साथियों की तुलना में भारत की अर्निंग ग्रोथ (Earnings Growth) कैसी रहती है, इस पर निर्भर करेगी।
