भारत का एनर्जी प्लान: अमेरिका से डील, रूस का इनकार! जानिए क्या है पूरा मामला?

INTERNATIONAL-NEWS
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
भारत का एनर्जी प्लान: अमेरिका से डील, रूस का इनकार! जानिए क्या है पूरा मामला?
Overview

भारत अपनी एनर्जी सप्लाई को और मजबूत करने के लिए नए कदम उठा रहा है। यह तब हो रहा है जब अमेरिकी व्यापार समझौते की खबरों के बीच रूस की ओर से तेल खरीद रोकने के दावों का खंडन आया है। रिफाइनर्स अभी सरकारी निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।

बदलते एनर्जी समीकरण, बढ़ी भारत की चिंता

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक हालातों को देखते हुए भारत के एनर्जी सोर्सेज को डाइवर्सिफाई करने की बात कही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्रेड एग्रीमेंट का ऐलान किया था। इस डील में यह भी शर्त बताई जा रही थी कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। इसके बदले में भारत को अपने सामानों पर अमेरिकी टैरिफ में बड़ी राहत मिलने की बात कही गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो यह भी संकेत दिया था कि भारत अब अमेरिका और संभवतः वेनेज़ुएला से तेल खरीदेगा।

रूस का खंडन: 'कोई डील नहीं हुई'

हालांकि, इस कहानी में एक नया मोड़ तब आया जब क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) ने मंगलवार को साफ किया कि भारत की ओर से रूस से तेल की खरीद रोकने को लेकर उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को ट्रंप के बयानों का बारीकी से विश्लेषण कर रहा है, लेकिन नई दिल्ली से ऐसे किसी फैसले की सूचना नहीं है। रूस भारत के साथ अपने मजबूत सामरिक रिश्तों को बेहद अहम मानता है और द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने पर जोर दे रहा है।

रिफाइनर्स को चाहिए स्पष्ट निर्देश

जमीनी हकीकत की बात करें तो भारतीय रिफाइनर्स को अभी तक सरकार की ओर से रूस से तेल खरीदना बंद करने का कोई सीधा निर्देश नहीं मिला है। सूत्रों का कहना है कि किसी भी तरह के बदलाव के लिए रिफाइनर्स को मौजूदा खरीद कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने के लिए 'विंड-डाउन पीरियड' की आवश्यकता होगी। इसका मतलब है कि अगर सरकार तेल खरीद रणनीति में कोई बदलाव का फैसला करती भी है, तो उसका अमल तत्काल नहीं होगा।

अमेरिकी डील में कृषि को मिली राहत

एनर्जी इंपोर्ट के अलावा, पीयूष गोयल ने यह भी साफ किया कि अमेरिकी ट्रेड डील में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों, खासकर कृषि और डेयरी उत्पादों को सुरक्षित रखा गया है। हालाँकि, विपक्ष इस डील की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है और जानना चाहता है कि अमेरिका को कृषि बाजार में कितनी पहुंच मिली है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.