India Engineering Exports: जून में **21%** का शानदार उछाल, पहुंचा **$11.48 बिलियन**

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Engineering Exports: जून में **21%** का शानदार उछाल, पहुंचा **$11.48 बिलियन**

जून महीने में भारत के इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट में **21%** का जबरदस्त इजाफा हुआ है, जो **$11.48 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है। चीन और अमेरिका से बढ़ी मांग इस उछाल की मुख्य वजह बनी है। यह ग्रोथ भारत के ट्रेड बैलेंस को स्थिर करने में मददगार साबित हो रही है, भले ही शिपिंग लागतें और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा हो।

Detailed Coverage

इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट में दिखी दमदार रिकवरी

भारत के इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट सेक्टर ने जून में सालाना आधार पर 21% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है, जो $11.48 बिलियन के आंकड़े को पार कर गया है। यह तेजी वैश्विक स्तर पर इंडस्ट्रियल कंपोनेंट्स की मांग में सुधार का संकेत देती है, खासकर तब जब लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों पर लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां बनी हुई हैं।

इस बढ़ोतरी में चीन को हुए एक्सपोर्ट में 74% का इजाफा एक बड़ा फैक्टर रहा, जो कुल $361.47 मिलियन रहा। वहीं, अमेरिका भारतीय इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स के लिए सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बना रहा, जहां से $1.95 बिलियन की खरीद दर्ज की गई। ओमान जैसे अन्य बाजारों ने भी इस महीने $259 मिलियन के आसपास के मजबूत आयात के साथ तेजी दिखाई है।

व्यापार घाटे और सेक्टर की सेहत पर असर

अब इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स भारत के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट का 28.4% हिस्सा रखते हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में, सेक्टर का कुल एक्सपोर्ट $34.14 बिलियन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 18.09% अधिक है। यह परफॉर्मेंस भारत के व्यापार संतुलन (Balance of Trade) के लिए काफी अहम है, क्योंकि देश सप्लाई चेन में देरी से जुड़ी शिपिंग और बीमा लागतों के बढ़ते बोझ से जूझ रहा है।

हालांकि, कुल मिलाकर रुझान सकारात्मक है, पर विभिन्न प्रोडक्ट कैटेगरी और भौगोलिक क्षेत्रों में प्रदर्शन में भिन्नता देखी गई है। अप्रैल-जून तिमाही के दौरान, 34 प्रमुख इंजीनियरिंग कैटेगरी में से 27 में ग्रोथ देखने को मिली। लेकिन, इंटरनल-कम्बशन इंजन (Internal-Combustion Engines) और लेड प्रोडक्ट्स (Lead Products) जैसे सेगमेंट में एक्सपोर्ट वॉल्यूम में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, ट्रेड डेटा यह भी दर्शाता है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे क्षेत्रों से मांग में कुछ बाधाएं आईं, जिसके परिणामस्वरूप पिछले साल की तुलना में शिपमेंट कम रहे।

सेक्टर के लिए आगे की राह

भविष्य में, इस एक्सपोर्ट ग्रोथ की निरंतरता वैश्विक मांग की स्थिरता और निर्माताओं की इनपुट प्राइस वोलेटिलिटी (Input Price Volatility) को प्रबंधित करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। EEPC इंडिया, जो एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल है, ने इस बात पर जोर दिया है कि सतत ग्रोथ के लिए सरकारी सहायता और उद्योग की लागत प्रबंधन क्षमता महत्वपूर्ण है, खासकर जब शिपिंग व्यवधान जारी हैं। निवेशकों और उद्योग जगत के हितधारकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या चीन और अमेरिका से मजबूत मांग जारी रहती है, या मध्य पूर्व के कुछ बाजारों में शिपमेंट में आई गिरावट वहां मांग में नरमी का संकेत देती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.