India Investment Haven: AI Rally Cools, Global Investors Look Towards India!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Investment Haven: AI Rally Cools, Global Investors Look Towards India!

वैश्विक AI बूम के ठंडा पड़ने के साथ, भारत अब निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभर रहा है। Vallum Capital के मनीष भंडारी का कहना है कि जब ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देश AI के चलते बहुत महंगे हो गए और फिर गिरे, तब भारत की स्थिर वैल्यूएशन्स और घरेलू कमाई ने इसे एक सुरक्षित दांव बना दिया है।

भारत में क्यों बढ़ रहा है निवेशकों का भरोसा?

दुनिया भर के निवेशक अब भारत को एक भरोसेमंद निवेश डेस्टिनेशन के तौर पर देख रहे हैं। हाल ही में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर जो ग्लोबल मार्केट में बूम आया था, भारत उसमें ज्यादा शामिल नहीं हुआ। ऐसे में, जिन उभरते बाजारों में AI सेक्टर के कारण भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, वहां से पैसा निकालकर निवेशक अब भारत की तरफ रुख कर रहे हैं।

वैल्यूएशन का बड़ा अंतर

Vallum Capital के CEO और पोर्टफोलियो मैनेजर, मनीष भंडारी के मुताबिक, भारत और दूसरे उभरते बाजारों में एक बड़ा अंतर साफ दिख रहा है। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देश AI पर फोकस के कारण अपने 10 साल के औसत से 85% और 71% तक महंगे हो गए थे। इसके विपरीत, भारत का बाजार अपने ऐतिहासिक औसत से 2.39% डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। यह बड़ा अंतर बताता है कि जैसे-जैसे AI का ग्लोबल ट्रेंड करेक्शन झेल रहा है, भारत का बाजार, जो मजबूत घरेलू मांग और कमाई (Earnings) से चल रहा है, संस्थागत फंडों (Institutional Funds) के लिए एक पसंदीदा जगह बन सकता है।

AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारतीय कंपनियों का जलवा

AI के भविष्य के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश एक अहम थीम बनता जा रहा है। भारतीय कंपनियां सिर्फ सॉफ्टवेयर या चिप डिजाइन पर ही नहीं, बल्कि सपोर्टिंग सेक्टर्स में भी मौके तलाश रही हैं। इनमें पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, कूलिंग सिस्टम, प्रिसिजन कंपोनेंट्स और स्पेशलिटी केमिकल्स बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। जैसे-जैसे AI-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर की ग्लोबल डिमांड बढ़ेगी, भारत की वे कंपनियां जो इन खास जरूरतों को पूरा कर सकती हैं, उनके लिए बेहतर मौके बनेंगे।

कमाई (Earnings) में ग्रोथ, पर सेलेक्टिव रहना ज़रूरी

भले हीoutlook पॉजिटिव हो, लेकिन मार्केट का माहौल अभी भी कॉम्प्लेक्स है। अनुमान है कि FY26-28 तक कंपनियों की कमाई 15% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ेगी, लेकिन यह ग्रोथ सब जगह एक जैसी नहीं है। बड़े सेक्टर्स जैसे ऑयल एंड गैस, टेलीकॉम और कंज्यूमर स्टेपल्स की स्ट्रक्चरल चुनौतियों के कारण इंडेक्स की परफॉर्मेंस पर असर पड़ रहा है। वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट्स ज्यादा मजबूती दिखा रहे हैं, जिनकी कमाई में 21% और 32.6% की ग्रोथ दर्ज की गई है। यह दिखाता है कि निवेशकों को किसी ब्रॉड मार्केट रैली पर निर्भर रहने के बजाय सेलेक्टिव होना होगा।

जोखिम और सावधानी

बाजार की भावनाओं को प्रभावित करने वाले कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। खासकर मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) एनर्जी की कीमतों और ट्रेड स्टेबिलिटी के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, अमेरिका की फिस्कल चुनौतियां (Fiscal Challenges) ग्लोबल निवेशकों की नजर में हैं, जिससे लिक्विडिटी में बदलाव आ सकता है और भारतीय रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है। देश के अंदर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ब्याज दरों पर न्यूट्रल रुख बनाए हुए है, और महंगाई के ट्रेंड में बड़े बदलाव के बिना दरें बढ़ने की उम्मीद कम है। मौजूदा कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) कंट्रोल में है, जो डोमेस्टिक इकोनॉमी को सपोर्ट कर रहा है।

कमाई की क्वालिटी पर फोकस

निवेशकों के लिए सबसे अहम है कमाई की क्वालिटी। Vallum Capital के रिसर्च के अनुसार, लिस्टेड कंपनियों में सिर्फ 24% ही रेवेन्यू, प्रॉफिट मार्जिन और असल अर्निंग ग्रोथ के कड़े पैमानों पर खरी उतरती हैं। निवेशकों को असली प्राइसिंग पावर और टेंजिबल एसेट्स वाली कंपनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए फार्मा कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (CDMO), फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से जुड़े टेक्सटाइल अवसर और डिफेंस एंसिलरीज जैसे सेक्टर्स पर नज़र रखनी चाहिए। इन निवेशों की लॉन्ग-टर्म सफलता कंपनी की योजनाओं को लागू करने और वोलेटाइल ग्लोबल माहौल में लागत मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.