नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत ने वहां **11** सदस्यीय बचाव दल भेजा है। **26** अगस्त को आई इस त्रासदी में **600** से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिसका सीधा असर नेपाल के हाइड्रोलॉजिकल और इंश्योरेंस सेक्टर पर दिख रहा है।
राहत और बचाव कार्य
भारत से पहुंची 11 सदस्यीय रेस्क्यू टीम रसुवा और नुवाकोट जिलों में फंसे लोगों को निकालने के मिशन पर जुटी है। इस पूरे ऑपरेशन को इंटरनेशनल टनल एक्सपर्ट Professor Arnold Dix की देखरेख में अंजाम दिया जा रहा है, ताकि मलबे में दबे इन्फ्रास्ट्रक्चर से सुरक्षित तरीके से लोगों को बाहर निकाला जा सके।
पावर सेक्टर पर बड़ा असर
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुई इस प्राकृतिक आपदा ने 748 MW की हाइड्रोलॉजिकल कैपेसिटी को बुरी तरह प्रभावित किया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 13 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स बाढ़ और मलबे की चपेट में हैं, जिससे वहां काम पूरी तरह ठप हो गया है।
बाजार पर असर (Market Impact)
नेपाल स्टॉक एक्सचेंज (Nepal Stock Exchange) पर इसका सीधा असर दिख रहा है। बाढ़ की खबरों के बाद हाइड्रोलॉजिकल सब-इंडेक्स में 2.84% की गिरावट आई, जबकि इंश्योरेंस सेक्टर पर दबाव और ज्यादा रहा और इसका इंडेक्स 3.90% तक टूट गया। निवेशकों को भारी नुकसान और इंश्योरेंस क्लेम के दावों की चिंता सता रही है।
आगे की चुनौतियां
भोतेकोशी और त्रिशूली नदियों के जलस्तर के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में लगातार बाधाएं आ रही हैं। फिलहाल, प्रोजेक्ट डेवलपर्स और इंश्योरेंस कंपनियों के लिए असली चुनौती तब सामने आएगी जब नुकसान का पूरा आकलन (damage assessment) पूरा होगा, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है।
