India-Chile Trade Deal: क्रिटिकल मिनरल्स के लिए भारत की बड़ी चाल!

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AuthorNeha Patil|Published at:
India-Chile Trade Deal: क्रिटिकल मिनरल्स के लिए भारत की बड़ी चाल!

भारत और चिली के बीच एक बड़े आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। भारत के कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल 24 से 28 अगस्त, 2026 तक चिली का दौरा करेंगे। इस मुलाकात का मुख्य मकसद भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर के लिए लिथियम और कॉपर जैसे क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) तक प्राथमिकता वाली पहुंच सुनिश्चित करना है। साथ ही, चिली के सामानों के लिए मार्केट एक्सेस (बाजार पहुंच) से जुड़े मौजूदा विवादों को सुलझाना भी एजेंडे में है।

सप्लाई चेन को मिलेगी मजबूती

यह समझौता सिर्फ टैरिफ (शुल्क) कम करने से कहीं बढ़कर है। भारत का मुख्य फोकस क्रिटिकल मिनरल्स - खास तौर पर लिथियम और कॉपर - की भरोसेमंद और लंबी अवधि की सप्लाई को सुरक्षित करना है। ये दोनों ही खनिज इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद जरूरी हैं।

फिलहाल, भारत इन खनिजों के लिए कुछ चुनिंदा ग्लोबल सप्लायर्स पर बहुत ज्यादा निर्भर है। चिली, जो दुनिया के सबसे बड़े कॉपर उत्पादकों में से एक है और जहां लिथियम के विशाल भंडार हैं, के साथ साझेदारी करके भारत अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाना चाहता है। इस कदम का मकसद कीमत में उतार-चढ़ाव और सप्लाई की कमी के जोखिम को कम करना है। निवेशकों के लिए, यह भारत के बढ़ते ग्रीन एनर्जी सेक्टर के लिए एक मजबूत इंडस्ट्रियल बैकबोन बनाने की दिशा में एक स्ट्रैटेजिक (रणनीतिक) प्रयास है।

नीतिगत बदलाव और व्यापारिक मांगों का संतुलन

डील का रास्ता आसान नहीं है। चिली में राष्ट्रपति जोस एंटोनियो कास्ट के नेतृत्व वाली नई सरकार के मार्च 2026 में कार्यभार संभालने के बाद से औपचारिक बातचीत कई महीनों से रुकी हुई थी। इस राजनीतिक बदलाव के कारण नई सरकार के अपनी प्राथमिकताओं का मूल्यांकन करने तक बातचीत में थोड़ी देरी हुई।

राजनीतिक बदलावों के अलावा, दोनों देश मार्केट एक्सेस को लेकर जटिल मांगों से भी निपट रहे हैं। चिली भारतीय बाजार में अपने उत्पादों के लिए बेहतर एंट्री टर्म्स (प्रवेश शर्तें) की मांग कर रहा है, जबकि भारत खनिजों की उपलब्धता पर विशिष्ट आश्वासन चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध काफी बढ़े हैं, 2025 में द्विपक्षीय व्यापार $5.38 बिलियन तक पहुंच गया था। 2025 में, चिली को भारतीय एक्सपोर्ट (निर्यात) में 14% की बढ़ोतरी हुई, जबकि चिली से इम्पोर्ट (आयात) में काफी तेजी आई, जिसका मुख्य कारण सोने की खरीद में वृद्धि रही।

आगामी बातचीत इस बात का एक बड़ा संकेत होगी कि क्या दोनों देश अपनी आर्थिक जरूरतों को एक साथ ला सकते हैं। निवेशकों को CEPA पर हस्ताक्षर से जुड़ी भविष्य की अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए, खासकर खनिज अन्वेषण अधिकारों (mineral exploration rights) और सप्लाई कोटे (supply quotas) पर स्पष्ट प्रतिबद्धताओं पर। ये फैक्टर सीधे तौर पर भारत की इंडस्ट्रियल और EV मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन की लागत संरचना (cost structure) और सुरक्षा को प्रभावित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.