भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रही डिप्लोमैटिक तल्खी खत्म होती दिख रही है। दोनों देशों ने साल 2030 तक **$70 बिलियन** (कनाडाई डॉलर) के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है, जिससे ऊर्जा और कमोडिटी सेक्टर में नई उम्मीदें जगी हैं।
आर्थिक रिश्तों की नई शुरुआत
न्यूयॉर्क में 81वीं UN जनरल असेंबली के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद की मुलाकात ने भविष्य की दिशा तय कर दी है। दोनों देशों ने पुराने विवादों को पीछे छोड़ते हुए आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया है। कनाडा में मार्च 2025 में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक कामकाज सामान्य करने की प्रक्रिया तेज हो गई थी।
बाजार पर असर
भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है। कनाडा भारत के लिए ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कमोडिटी का एक बड़ा पार्टनर रहा है। हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वेनेजुएला के अधिकारियों के साथ भी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चर्चा की है, जो भारत की सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन (Supply Chain Diversification) की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
आगे क्या उम्मीद करें?
दिसंबर में होने वाले G20 समिट से पहले ट्रेड नेगोशिएशंस पर सबकी नजरें टिकी होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित कनाडा यात्रा इस दोस्ती को और मजबूत बना सकती है। आने वाले समय में ट्रेड फ्रेमवर्क, टैरिफ एडजस्टमेंट्स और नए इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट्स पर होने वाली घोषणाएं यह तय करेंगी कि दोनों देश इस लक्ष्य को कितनी तेजी से हासिल कर पाते हैं। नॉर्थ अमेरिकन ट्रेड कॉरिडोर में मौजूद कंपनियों के लिए यह स्थिरता एक बड़े मौके की तरह है।
