भारत और कनाडा ने साल 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को **CAD 70 अरब** तक ले जाने का बड़ा संकल्प लिया है। दोनों देश साल 2026 के अंत तक एक महत्वपूर्ण ट्रेड पार्टनरशिप एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं, जिससे AI और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश को रफ्तार मिलेगी।
भारत और कनाडा ने द्विपक्षीय व्यापार को CAD 70 अरब—यानी लगभग ₹4.65 लाख करोड़—तक पहुंचाने का औपचारिक लक्ष्य तय किया है। नई दिल्ली में हाल ही में हुई हाई-लेवल डिप्लोमैटिक चर्चाओं और 'फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन' के दौरान इस आर्थिक रोडमैप पर जोर दिया गया, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश है।
ट्रेड पार्टनरशिप की राह
इस आर्थिक योजना का मुख्य केंद्र 2026 के अंत तक 'कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CEPA) को फाइनल करना है। इसका उद्देश्य ट्रेड बैरियर्स को कम करना और गुड्स और सर्विसेज के लिए एक खुला मार्केट बनाना है। निवेशकों के लिए, एक सफल CEPA ट्रेड लॉजिस्टिक्स को आसान बनाएगा। साथ ही, दोनों देश 'बायलैटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी' (BIT) पर भी विचार कर रहे हैं, जो क्रॉस-बॉर्डर निवेश को सुरक्षा और स्पष्ट नियम प्रदान करेगी।
किन सेक्टर्स पर है फोकस?
दोनों सरकारें उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं जिनमें लॉन्ग-टर्म वैल्यू है। इनमें क्रिटिकल मिनरल्स, एनर्जी सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट शामिल हैं। इस सहयोग का उद्देश्य सप्लाई चेन में आने वाली अस्थिरता को कम करना है। यह कदम कनाडा के बड़े इंस्टीट्यूशनल फंड्स को भारत के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश का मौका देगा।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि CAD 70 अरब का लक्ष्य बड़ा है, लेकिन निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि ट्रेड एग्रीमेंट्स जटिल होते हैं और इनमें समय लगता है। ऐतिहासिक कूटनीतिक संवेदनशीलताएं और पुरानी बातचीत का रुकना यह याद दिलाता है कि राजनीतिक और आर्थिक संबंध नाजुक हो सकते हैं। एग्रीमेंट का क्रियान्वयन दोनों देशों की राजनीतिक टाइमलाइन और ग्लोबल इकोनॉमिक स्थिति पर निर्भर करेगा।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
अगले कुछ सालों में CEPA की बातचीत की प्रगति सबसे महत्वपूर्ण होगी। निवेशकों को बायलैटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी से जुड़े अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही तय करेगा कि कैपिटल फ्लो के लिए कितनी सुरक्षा और स्पष्टता मिलती है। फाइनेंस मिनिस्ट्रीज के बीच होने वाली बातचीत इस डील की सफलता के लिए प्रमुख ड्राइवर बनी रहेगी।
