तिब्बत में आए भीषण बर्फीले भूस्खलन और बाढ़ के बाद, Beijing स्थित भारतीय दूतावास ने लापता नागरिकों की पहचान के लिए उनके परिवारों से DNA प्रोफाइल जमा करना शुरू कर दिया है। नेपाल-तिब्बत सीमा पर इस आपदा ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
फॉरेंसिक पहचान की प्रक्रिया
लापता लोगों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए भारतीय दूतावास चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। जेनेटिक सैंपल्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य CODIS फॉर्मेट में प्रोसेस किया जा रहा है। अधिकारियों ने सैंपल कलेक्शन के लिए एक सख्त नियम तय किया है, जिसमें पहले माता-पिता, फिर जीवनसाथी और बच्चे, और अंत में भाई-बहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। आपदा में हुए भीषण नुकसान के कारण शवों की स्थिति को देखते हुए फॉरेंसिक जांच ही पहचान का एकमात्र जरिया रह गई है।
रीजनल इंफ्रास्ट्रक्चर पर चोट
यह मानवीय संकट तो अपनी जगह है ही, लेकिन साथ ही इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र के आर्थिक गलियारे को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। बाढ़ के कारण सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी क्षति पहुंची है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन दुर्गम और कीचड़ से भरे इलाकों में बहाली का काम बेहद चुनौतीपूर्ण होगा, जिससे प्रोजेक्ट्स में लंबा डिले हो सकता है।
ऑपरेशंस पर असर
इस आपदा ने निवेश की दृष्टि से अनिश्चितता पैदा कर दी है। जो कंपनियां Bhotekoshi नदी के आसपास हाइड्रोपावर या निर्माण कार्यों में शामिल हैं, उन्हें अब भारी परिचालन व्यवधानों (Operational Disruptions) का सामना करना पड़ सकता है।
राहत और बचाव कार्य
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नेपाल में 1,350 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र में 43 मौतें दर्ज की गई हैं और 500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अब निवेशकों की नजर इन परियोजनाओं की बहाली की समय-सीमा और इंश्योरेंस दावों के निपटान पर टिकी है।
