भारत और रूस ने 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को **$100 बिलियन** और निवेश को **$50 बिलियन** तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके लिए दोनों देश अब एनर्जी सेक्टर के अलावा फार्मा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।
भारत और रूस ने अपनी आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का खाका तैयार कर लिया है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित INNOPROM India 2026 इवेंट के दौरान, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलिखानोव ने $100 बिलियन के ट्रेड और $50 बिलियन के इन्वेस्टमेंट टारगेट पर मुहर लगाई।
व्यापार में मौजूद बड़ी चुनौतियां
FY26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग $60 बिलियन रहा, लेकिन इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसका 80% से ज्यादा हिस्सा केवल रूसी कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात पर टिका है। $40 बिलियन के अंतर को पाटने के लिए अब सरकार नॉन-एनर्जी सेक्टर जैसे फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल और टेक्सटाइल्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
इन्वेस्टमेंट और बुनियादी ढांचा
दोनों देश फिलहाल 40 प्राथमिकता वाली इन्वेस्टमेंट परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हैं। निवेशकों को कानूनी सुरक्षा देने के लिए एक नई 'बायलैटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी' को भी फास्ट-ट्रैक किया जा रहा है।
पेमेंट और लॉजिस्टिक्स का समाधान
ग्लोबल प्रतिबंधों और पेमेंट की बाधाओं को दूर करने के लिए दोनों देश लोकल करेंसी में व्यापार करने पर जोर दे रहे हैं। इसके अलावा, सप्लाई चेन को सुगम बनाने के लिए International North-South Transport Corridor और Chennai-Vladivostok Maritime Corridor को प्राथमिकता दी जा रही है।
निवेशकों के लिए जरूरी निगरानी (Monitorables)
फिलहाल, Eurasian Economic Union के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत जारी है। हालांकि, टारगेट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या एनर्जी के बाहर का एक्सपोर्ट डबल डिजिट में रफ्तार पकड़ पाता है या नहीं। आने वाली तिमाहियों में इन्वेस्टमेंट ट्रीटी और नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट के आंकड़े यह तय करेंगे कि यह लक्ष्य कितना यथार्थवादी है।
