India E-commerce Export: अब विदेशी कंपनियां भारत में रखेंगी एक्सपोर्ट का स्टॉक! जानिए नए नियम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India E-commerce Export: अब विदेशी कंपनियां भारत में रखेंगी एक्सपोर्ट का स्टॉक! जानिए नए नियम

भारत सरकार ने विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब ये कंपनियां भारतीय सामानों का स्टॉक सिर्फ एक्सपोर्ट के लिए भारत में रख सकेंगी। यह कदम MSMEs को अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स में मदद करने के लिए उठाया गया है, जिसके तहत 'Exporter-on-Record' सिस्टम बनाया गया है। हालांकि, सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं कि इस स्टॉक का इस्तेमाल घरेलू बिक्री के लिए कतई नहीं होगा।

एक्सपोर्ट के लिए स्टॉक रखने की इजाजत

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक नया ढांचा पेश किया है। इसके तहत, विदेशी फंडिंग वाली ई-कॉमर्स कंपनियां अब खास तौर पर एक्सपोर्ट के लिए भारत में इन्वेंटरी (Stock) रख सकती हैं। DGFT के हालिया अपडेट्स में इस पॉलिसी बदलाव की जानकारी दी गई है। पहले ऐसी कंपनियों के लिए डोमेस्टिक रिटेल के लिए इन्वेंटरी-आधारित मॉडल पर पाबंदियां थीं, जिन पर अब ढील दी गई है।

Exporter-on-Record (EOR) सिस्टम

नए नियमों के तहत, विदेशी फंडिंग वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को इस ऑपरेशन के लिए 'Exporter-on-Record' (EOR) के तौर पर रजिस्टर कराना होगा। भारतीय मैन्युफैक्चरर्स और MSMEs डोमेस्टिक पर्पस के लिए 'सेलर-ऑन-रिकॉर्ड' बने रहेंगे और अपना टैक्स डॉक्यूमेंटेशन संभालेंगे। वहीं, EOR का रोल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जटिलताओं से निपटने में मदद करेगा। इसमें कस्टम क्लीयरेंस, डेस्टिनेशन देशों में रेगुलेटरी कंप्लायंस, स्पेशल पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

घरेलू बिक्री पर सख्त पाबंदी

मार्केट कंपटीशन को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार ने इस फ्रेमवर्क में खास सुरक्षा उपाय जोड़े हैं। पॉलिसी के तहत, स्पेकुलेटिव इन्वेंटरी बनाने पर पूरी तरह रोक है। साथ ही, यह अनिवार्य है कि इस मॉडल के तहत रखे गए किसी भी स्टॉक को स्पष्ट रूप से पहचाना जाए और डिजिटल रूप से अलग रखा जाए। सबसे अहम बात यह है कि एक्सपोर्ट के लिए रखे गए इस स्टॉक को घरेलू बिक्री के लिए इस्तेमाल करने पर सख्त मनाही है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि विदेशी प्लेटफॉर्म एक्सपोर्ट चैनल का इस्तेमाल डोमेस्टिक रिटेल पर मौजूदा प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए न करें।

निवेशकों और इंडस्ट्री के लिए क्या है मायने?

यह पॉलिसी उन लॉजिस्टिक्स और कंप्लायंस की बाधाओं को दूर करने का एक अहम कदम है, जो अक्सर भारतीय छोटे व्यवसायों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने से रोकती हैं। प्लेटफॉर्म्स को इंटरनेशनल शिपमेंट की जिम्मेदारी संभालने की इजाजत देकर, सरकार का लक्ष्य विदेशी बाजारों में भारतीय निर्मित उत्पादों की मात्रा बढ़ाना है।

क्या हैं चिंताएं?

हालांकि, इस कदम पर ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) जैसे व्यापार विश्लेषकों और संगठनों ने चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि भले ही वर्तमान ढांचा सिर्फ एक्सपोर्ट तक सीमित है, लेकिन यह विदेशी प्लेटफॉर्म्स के लिए भारतीय जमीन पर फिजिकल इन्वेंटरी रखने का एक रेगुलेटरी प्रेसिडेंट सेट करता है। इससे भविष्य में डोमेस्टिक बिक्री के लिए भी इसी तरह के इन्वेंटरी ओनरशिप मॉडल की मांग उठने की आशंका है, जो मौजूदा ई-कॉमर्स परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

आगे क्या?

अब यह देखना अहम होगा कि कंपनियां कितनी तेजी से EOR स्टेटस अपनाती हैं और सरकार डिजिटल रिपॉजिटरी की निगरानी कैसे करती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एक्सपोर्ट इन्वेंटरी डोमेस्टिक स्टॉक से अलग रहे। निवेशक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि क्या इससे छोटे निर्माताओं के लिए एक्सपोर्ट वॉल्यूम में कोई खास बढ़ोतरी होती है और रेगुलेटरी ओवरसाइट संभावित कंप्लायंस चुनौतियों से कैसे निपटती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.