भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बैंगलोर अब इंडोनेशिया में अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय कैंपस खोलने जा रहा है। वहीं, दोनों देशों के बीच हुए नए हेल्थ रेगुलेटरी एग्रीमेंट्स से भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए इंडोनेशियाई बाज़ार में पहुँच आसान होगी।
भारत और इंडोनेशिया के बीच शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में रिश्तों को मजबूत करने के लिए कई बड़े द्विपक्षीय समझौते हुए हैं। इसी कड़ी में, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) बैंगलोर इंडोनेशिया के ईस्ट जावा प्रांत में अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय कैंपस स्थापित करेगा। यह कदम आसियान (ASEAN) क्षेत्र में भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की पहुँच का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
फार्मा कंपनियों के लिए खुला बाज़ार?
स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए समझौतों का खास असर भारतीय फार्मा सेक्टर पर पड़ने की उम्मीद है। भारत की सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) और इंडोनेशिया की नेशनल एजेंसी ऑफ ड्रग एंड फूड कंट्रोल के बीच एक MOU पर हस्ताक्षर हुए हैं। इसका मकसद मेडिकल प्रोडक्ट्स के नियमों को एक समान बनाना है।
इस रेगुलेटरी सहयोग से भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को लेकर जानकारी का आदान-प्रदान आसान होगा और इंडोनेशियाई बाज़ार में प्रवेश के रास्ते खुलेंगे। इससे इंडोनेशिया में सस्ती और अच्छी क्वालिटी की भारतीय दवाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, स्वास्थ्य कार्यबल सहयोग पर भी एक समझौता हुआ है। इसमें फेलोशिप प्रोग्राम और मेडिकल प्रोफेशनल्स का आदान-प्रदान शामिल है, जहाँ भारत इंडोनेशियाई स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए क्षमता-निर्माण सहायता प्रदान करेगा।
हालांकि, ये समझौते बिज़नेस ग्रोथ के लिए एक मजबूत नींव रखते हैं, लेकिन भारतीय फार्मा एक्सपोर्टर्स के लिए रेवेन्यू पर असल असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ये रेगुलेटरी फ्रेमवर्क कितनी जल्दी प्रोडक्ट अप्रूवल और ज़मीनी स्तर पर आने वाली बाधाओं को कम करने में सफल होते हैं।
फार्मा सेक्टर पर नज़र रखने वाले निवेशक इस बात पर गौर कर सकते हैं कि क्या यह रेगुलेटरी तालमेल इंडोनेशिया को भारतीय दवाओं के एक्सपोर्ट में उल्लेखनीय वृद्धि की ओर ले जाता है। भविष्य में, IIM बैंगलोर कैंपस के संचालन की टाइमलाइन और भारतीय दवा निर्माताओं के लिए सरलीकृत लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं से संबंधित किसी भी घोषणा पर नज़र रखी जा सकती है। इस द्विपक्षीय यात्रा में रक्षा, समुद्री सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स पर भी चर्चा हुई, जो कई रणनीतिक क्षेत्रों में व्यापारिक संबंधों को गहरा करने के इरादे को दर्शाता है।
